ओ मेरे प्रियतम, 
                      कैसे पल भर में सब बदल जाता है एक छोटी सी मुस्कान और आंसुओं को राहत .....प्रिय मैंने तुमसे जोड़ लिया मन का बंधन और देखो बिखर गयी खुशियाँ ....लेने लगी मन ही मन तुम्हारा नाम और देखो जल उठी लौ ....न जाने कहाँ चली गयी वो तपन ......बौछार सी बरस गयी शीतलता की .....मेरे प्रिय तुम इतने प्यारे हो तो क्यों हो ? मेरी जान भले ही जाये लेकिन प्रिय तुम्हारा ये प्यारा रूप यूं ही मेरे मन में बसा रहे ....मेरे अंग अंग को पुलकित करता रहे ....
तुमने छु लिया यूं आकर अहसासों में,, मानों मेरी हर मन्नत पूरी हो गयी ....हर दुआ कुबूल हो गयी .....और छलक पड़े आँखों से अश्क...... न न प्रिय, यह आँसू दर्द के, दुख के नहीं बल्कि खुशी के हैं ...मैंने कहा था न, एक बार तुमसे ...कि इन अशकों से कोई करीबी रिश्ता सा बन गया है ....बड़ी वफ़ा से साथ निभाए जाते हैं ....बिना किसी की परवाह किए ........!! ओ सनम मेरा जीवन ,, मेरा संसार... मेरी खुशियाँ ... मेरी हर रौनक अब तुमसे ही तो है ...मेरे चेहरे का नूर, तू सदा मुस्कराये .....दामन खुशियों से रहे भरा और राह में फूल बिछ जाये ....मैं तो काँटों में भी निभा लूँगी ....पर तेरी जरा सी तकलीफ मेरे दिल को दर्द ...घबराहट और बेचैनी से भर देती है ...तू सलामत है तो क्या यही काफी नहीं है मेरे जीने के लिए ......कभी मेरी सच्चाई को आंक लेना मेरे प्रिय .....क्योंकि सच तो तुम्हें स्वयं ही महसूस होना चाहिए और जब दिल से दिल का रिश्ता जोड़ लिया तो कुछ भी कैसे छुपेगा ......

क्रमशः 
सीमा असीम

Comments

Popular posts from this blog

मुस्कुराना

यात्रा