कुपात्र
एक आदमी मरने के बाद जब यमराज के दरबार में पहुंचा तो वह निश्चिंत था कि उसके सत्कर्मों को देखते हुए उसे स्वर्ग ही दिया जाएगा। लेकिन तब उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब यमराज ने उसे बताया कि उसने पुण्य कम और पाप ज्यादा किए हैं, इसलिए पहले उसे ज्यादा समय तक नरक में रहना होगा और बाद में कुछ समय के लिए स्वर्ग में रहने का अवसर मिलेगा।
आदमी ने तुरंत प्रतिवाद किया- ' मगर यमराज जी, मैंने तो जीवन भर दान-पुण्य के अलावा कोई दूसरा काम किया ही नहीं। जितना कमाया सब दान कर दिया। इससे ज्यादा मैं क्या कर सकता था।'तब यमराज ने उसे असली बात बताई-' तुमने दान तो किया पर सुपात्रों को नहीं। तुम्हारा सारा दान कुपात्रों के हिस्से आया। तुमने स्वस्थ लोगों को दान देकर निकम्मा बनादिया। निकम्मा बन उन्होंने अपने घरवालों पर जुल्म ढाए, कई पाप किए।चूंकि यह सब तुम्हारे कारण हुआ इसलिए, उनके पाप भी तुम्हारे खाते में डाल दिए गए। ' हम अनजाने ही कुपात्रों को अन्न, वस्त्र, प्रेम आदि का दान कर देते हैं !!
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