आपकी याद


यूं मुस्कराए लब आज मेरे 
मानों सनम चले आए हैं 
किस कदर मेरी यादों में समाये 
कि पलको पे उतर आए हैं 
फिर यह इंतजार किसका है 
 कैसे कहूँ प्रिय कि तुमसे प्यार कितना है
हर कण कण पर आपका नाम लिखती हूँ 
हर स्वांस पर आपका नाम लेती हूँ 
ये आंसु मेरी आँखों से क्यों छलक पड़े प्रिय 
उन वादियों घाटियों में आपके संग ही विचरती हूँ 
कब सुबह से दोपहर कब शाम होती है 
रात को नींद आए तो ख्वाब में आपसे बात होती है 
कानों में हर वक्त आपके शब्द गूँजते हैं 
प्रिय मेरे सनम मैं आपको बहुत याद करती हूँ 
हर तरफ आपका ही दीदार होता है 
सिगरेट का धुआँ छल्ले बन गोल गोल घूमता है
गहरी सांस लेकर उसे आत्मसात करती हूँ 
आहों में, दिल मे बसे हो प्रिय आप ही सनम
आज एक बार दुआ में आपको फिर याद करती  हूँ
उस रब से मेरे सनम आपको मैं मांग लेती हूँ  !!
सीमा असीम


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