गतांक से आगे
दर्द ए दिल ॥दर्द जब दिल में होता है तो आँख रो पड़ती है ....न जाने ये कैसी चुभन है जो चुभ जाती है आर पार हो जाती है और रिसने लगता है दर्द ...प्रिय मैं तो प्रेम गीत लिख रही थी फिर ये दर्द कैसे उभर आया ? खुशी से चहकते मन में दुख कहाँ से भर गया ?हँसते मुस्कराते लबों पर अचानक से ये उदासी सी क्यों आ गयी ? विरह में तपता हुआ बदन और ज्यादा तपने लगा उफ़्फ़ ये तपन मेरी जान ले रही है ॥ प्रिय तुम बहुत याद आ रहे हो बहुत जायदा ॥क्या तुम्हें पता है ऐसा क्यों हो रहा है ?या ऐसा क्यों होता है ? तो बताओ न, मुझे बताओ ...क्या तुम्हें दर्द नहीं होता ? ये कैसे दर्द भरे अहसास हैं जो मेरा सुख, चैन, नींद, ख्वाब सब दर्द से भर देते हैं और अश्कों से छलक़ती आँखों पर एक ही गुहार होती है प्रिय ओ मेरे प्रिय न सताओ ॥न रुलाओ ॥ सच में बहुत दर्द होता है ...मेरा धड़कता हुआ दिल तुम्हारे साये से लिपट कर और तेज धडक उठता है ...बेकाबू होती हुई ये मेरी धड़कन सिर्फ एक सवाल पुछती है आखिर क्यों ??
दर्द दीवाना है मेरा और मैं इस दर्द की दीवानी हुई ...
रात की खामोशिया दर्द की खुशबू बिखेर देती हैं
जब चुभ जाते हैं तीर से मेरे दिल के दामन में
हवाएँ पटकती हैं सर और जाकर तुमसे कह देती हैं !!
क्रमशः
सीमा असीम
दर्द ए दिल ॥दर्द जब दिल में होता है तो आँख रो पड़ती है ....न जाने ये कैसी चुभन है जो चुभ जाती है आर पार हो जाती है और रिसने लगता है दर्द ...प्रिय मैं तो प्रेम गीत लिख रही थी फिर ये दर्द कैसे उभर आया ? खुशी से चहकते मन में दुख कहाँ से भर गया ?हँसते मुस्कराते लबों पर अचानक से ये उदासी सी क्यों आ गयी ? विरह में तपता हुआ बदन और ज्यादा तपने लगा उफ़्फ़ ये तपन मेरी जान ले रही है ॥ प्रिय तुम बहुत याद आ रहे हो बहुत जायदा ॥क्या तुम्हें पता है ऐसा क्यों हो रहा है ?या ऐसा क्यों होता है ? तो बताओ न, मुझे बताओ ...क्या तुम्हें दर्द नहीं होता ? ये कैसे दर्द भरे अहसास हैं जो मेरा सुख, चैन, नींद, ख्वाब सब दर्द से भर देते हैं और अश्कों से छलक़ती आँखों पर एक ही गुहार होती है प्रिय ओ मेरे प्रिय न सताओ ॥न रुलाओ ॥ सच में बहुत दर्द होता है ...मेरा धड़कता हुआ दिल तुम्हारे साये से लिपट कर और तेज धडक उठता है ...बेकाबू होती हुई ये मेरी धड़कन सिर्फ एक सवाल पुछती है आखिर क्यों ??
दर्द दीवाना है मेरा और मैं इस दर्द की दीवानी हुई ...
रात की खामोशिया दर्द की खुशबू बिखेर देती हैं
जब चुभ जाते हैं तीर से मेरे दिल के दामन में
हवाएँ पटकती हैं सर और जाकर तुमसे कह देती हैं !!
क्रमशः
सीमा असीम
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