गतांक से आगे
रिया मुस्करा
सुनो प्रिय ।जब मेरा मन दर्द और आसुओं के अथाह सागर में डूबा होता है तो कई कई दिन रात यूं ही गुजर जाते हैं और हमें अपना किसी भी तरह से कोई होश ही नहीं होता है ! जेहन में एक ही सवाल ऐसा क्यों?ख़ुद ही जवाब कि प्रेम तो तुमने ही किया और समर्पित किया उचित पात्र समझ कर बाकी उस रब की मर्ज़ी! सीने में अजीब सी जलन बेचैनी कि जो मेरा है वो आखिर सिर्फ मेरा क्यों नहीं जबकि मैं तो सिर्फ उसकी ही हूँ ...लेकिन फिर वही जवाब प्रेम तो दोनों ने किया लेकिन कोई सच्चा प्रेम समझ बैठा कोई खेल ...कोई निभा रहा है जान की बाजी लगाकर और कोई इसे व्यापार समझ सौदा करने लगा ! यह प्रेम की बातें हैं जो वही समझेगा जिसने सच्चे मन से किया और निभाया ...वो कैसे समझेगा जिसे परवाह ही नहीं ॥ख्याल ही नहीं ! मेरे प्यारे प्रियतम मैंने तो तुम्हें अपना प्रेम सौंप दिया अब तुम इसका क्या करते हो इसका निर्णय तुम्हारे ऊपर ही है ....क्योंकि इस प्रेम की खातिर तो हम सब कुछ हारे बैठे हैं ॥सब कुछ गवा के खाली हाथ रत हैं सच्ची लगन से इसकी तपस्या में .....और यह लगन यूं ही रहेगी जान के निकल जाने तक ॥क्रमशः
सीमा असीम
रिया मुस्करा
सुनो प्रिय ।जब मेरा मन दर्द और आसुओं के अथाह सागर में डूबा होता है तो कई कई दिन रात यूं ही गुजर जाते हैं और हमें अपना किसी भी तरह से कोई होश ही नहीं होता है ! जेहन में एक ही सवाल ऐसा क्यों?ख़ुद ही जवाब कि प्रेम तो तुमने ही किया और समर्पित किया उचित पात्र समझ कर बाकी उस रब की मर्ज़ी! सीने में अजीब सी जलन बेचैनी कि जो मेरा है वो आखिर सिर्फ मेरा क्यों नहीं जबकि मैं तो सिर्फ उसकी ही हूँ ...लेकिन फिर वही जवाब प्रेम तो दोनों ने किया लेकिन कोई सच्चा प्रेम समझ बैठा कोई खेल ...कोई निभा रहा है जान की बाजी लगाकर और कोई इसे व्यापार समझ सौदा करने लगा ! यह प्रेम की बातें हैं जो वही समझेगा जिसने सच्चे मन से किया और निभाया ...वो कैसे समझेगा जिसे परवाह ही नहीं ॥ख्याल ही नहीं ! मेरे प्यारे प्रियतम मैंने तो तुम्हें अपना प्रेम सौंप दिया अब तुम इसका क्या करते हो इसका निर्णय तुम्हारे ऊपर ही है ....क्योंकि इस प्रेम की खातिर तो हम सब कुछ हारे बैठे हैं ॥सब कुछ गवा के खाली हाथ रत हैं सच्ची लगन से इसकी तपस्या में .....और यह लगन यूं ही रहेगी जान के निकल जाने तक ॥क्रमशः
सीमा असीम
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