मेरे प्रिय
बस इतना सा ही तो प्यार है हमें तुमसे कि तुम्हारे नाम से शुरू होता है और तुम्हारे नाम पर खत्म हो जाता है !!!
बस इतनी सी खुशी ही तो है मेरी कि तुम्हारी खुशी में खुश हो जाता है  और दुख में दुखी हो जाता है ...
तुम्हारा गम मेरा गम बन जाता है... प्रिय, फिर सोचती हूँ कि तुम्हारे लिए कोई गम क्यों होता है .....क्यों बनाया है गम किसी ने .....लेकिन गर गम न होता तो प्यार कैसा होता ?
जुदाई न होती तो मिलन कैसा होता ? प्रिय कितना प्यारा लगता है पल
पल तुम्हारा इंतजार करना ...तुम्हें याद करना ....प्रिय एक बात तो बताओ तुम कैसे आ जाते हो मेरे ख्वाबों में ....कैसे बोलते बतियाते साथ खाते पीते हो समझ ही नहीं आता ...सपनों मे ही समा जाती हूँ तुम्हारी बाहों में ....देखो कैसे गुलाबी हो आए मेरे गाल ...सनम कैसे हाथ में हाथ डाल कर बैठ जाते हैं सबके सामने हम ख्वाबों में ....

हाज़िर है जान, जान-ए-मन, जान की क़सम

तेरी प्यार भरी बाहो मे ही निकलेगा दम !!
क्रमशः 
सीमा असीम

Comments

  1. प्रेम भाव ऐसी सघन अभिव्यक्ति, लाजवाब!

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