क्यों ये आँख झरती है
क्यों ये दर्द होता है
हैं क्यों इतनी बेचैनियां
क्यों मन उदास होताहै
 
 
बहुत छोटी है यह धरती 
हम आसमा के पार जाएँगे 
तुम साथ देना प्रिय 
हम हर बाधा पार कर जाएंगे 
            
जब शाम ढलती है
अश्क छलक आते हैं 
पोंछ लेती हूँ आँसू 
कहीं तुम उदास न होना 

ठंडी हवाएँ आकर अक्सर चूम जाती हैं 
तुम हो साथ मेरे अहसास दिला जाती हैं 
निहारती रहती हूँ यूं तस्वीर को तुम्हारी 
मन में यह अजीब प्यास जागा जाती हैं 

 हर अक्स में नजर तुम आ जाते हो 
वाकई तुम हो मुड़ मुड़ के देखती हूँ 
इस कदर याद में खो जाती हूँ 
कि रास्ता भी भूल जाती हूँ 

न जाने कब मिलेंगे हम
क्या कभी वो मौसम भी आएगा 
जी रही हूँ किस हाल में 
दिल का हाल क्या दिल तक पहुँच जाएगा !!
सीमा असीम

Comments

Popular posts from this blog

मुस्कुराना

याद