तुम आना  

मैं अपनी पवित्र आत्मा से पुकारती हूँ तुम्हें 
तुम आना  प्रिय तुम तब आना 
जब शाम के ढलने पर 
पंछी अपने दरख्तों के तरफ लौट रहे हो
जब सूर्य अपनी सिंदूरी लालिमा के साथ 
अस्ताचल में समा रहा हो 
तुम आना प्रिय तुम तब आना 
जब तारों से पूरा आकाश आच्छादित हो 
चाँद शरमाता मुस्काता चाँदनी की बाहों में सिमट जाये 
अंतहीन खुले आकाश के नीचे 
पूरा जहां सोया हो गहरी नींद में 
तुम आना प्रिय तुम तब आना 
जब मस्जिदों में अजान हो रही हो 
मंदिरों में शंख ध्वनि बज रही हो 
भोर की पहली किरण फूटने से पहले 
ओस से गीली हो धरा 
बस तुम आ जाना प्रिय तुम आ जाना 
क्षण भर के प्यार के बदले 
जमाने का असीम दर्द दे जाना उपहार में
तुम आना प्रिय तुम आना !

सीमा असीम

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