सुनो प्रिय
इस ब्रह्म मुहूर्त में लिख रही हूँ तुम्हें ... क्या खुशियाँ इतनी छोटी होती हैं और गम इतने बड़े ...समझ ही नहीं आता कि जरा से अहसास भर से ही मन खुशी से झूम उठता है ...क्या तुम जानते हो प्रेम ऐसा ही होता है जिसे न सरहदों की परवाह, न खुद का ख्याल, न कहने की, न सुनने की जरूरत, न कोई रंग न कोई रूप, बस ये अहसास में पलता है, बिना कहे ही हर भाषा समझ जाता है ..... न जाने क्यों आज तुम पर बहुत प्यार आया है ॥न जाने क्यों आज तुम्हें और करीब कर लेने को जी चाहता है॥ दिल की परतों के सबसे आखिरी छोर तक तुम्हें समा लेना चाहता है ...ये सब कैसे हुआ ? कब हुआ ? नहीं पता ...बस इतना पता है कि तुम मेरे रोम रोम में समा गए हो ॥मेरी स्वांस जब आती है न तो खुद ब खुद तुम्हारा नाम सुनाई देता है ...कभी आना और सुन जाना इन स्वर लहरियों को जो धड़कन के साथ एक मधुर राग अलापती हैं ,,,मेरे प्रिय ॥मेरे प्रीतम !! कि एक तेरा नाम ही जग से प्यारा है कि तू खुद ही कितना प्यारा होगा ....अब तुम हो तो जीवन है ॥हंसी है खुशी है ॥ सुख है तो दुख भी तुमसे ॥ तुम ही मेरी आराधना हो पुजा हो ॥ जीवन का सार भी तुम हो ... मेरे जीवन में जो माधुर्य है न वो तुमसे ही तो है मेरे प्रिय ...जो कुछ भी है सब तुमसे ही है....
ये अहसासे मोहब्बत है ॥ तुमसे है हाँ तुम्ही से तो ... करार भी तुमसे ही आता है और बेकरार भी तुम ही कर जाते हो ...
कि गूँजती है तेरी मोहब्बत मेरे दिल की गहराइयों में स्वछंद होकर ...
क्रमशः
सीमा असीम
इस ब्रह्म मुहूर्त में लिख रही हूँ तुम्हें ... क्या खुशियाँ इतनी छोटी होती हैं और गम इतने बड़े ...समझ ही नहीं आता कि जरा से अहसास भर से ही मन खुशी से झूम उठता है ...क्या तुम जानते हो प्रेम ऐसा ही होता है जिसे न सरहदों की परवाह, न खुद का ख्याल, न कहने की, न सुनने की जरूरत, न कोई रंग न कोई रूप, बस ये अहसास में पलता है, बिना कहे ही हर भाषा समझ जाता है ..... न जाने क्यों आज तुम पर बहुत प्यार आया है ॥न जाने क्यों आज तुम्हें और करीब कर लेने को जी चाहता है॥ दिल की परतों के सबसे आखिरी छोर तक तुम्हें समा लेना चाहता है ...ये सब कैसे हुआ ? कब हुआ ? नहीं पता ...बस इतना पता है कि तुम मेरे रोम रोम में समा गए हो ॥मेरी स्वांस जब आती है न तो खुद ब खुद तुम्हारा नाम सुनाई देता है ...कभी आना और सुन जाना इन स्वर लहरियों को जो धड़कन के साथ एक मधुर राग अलापती हैं ,,,मेरे प्रिय ॥मेरे प्रीतम !! कि एक तेरा नाम ही जग से प्यारा है कि तू खुद ही कितना प्यारा होगा ....अब तुम हो तो जीवन है ॥हंसी है खुशी है ॥ सुख है तो दुख भी तुमसे ॥ तुम ही मेरी आराधना हो पुजा हो ॥ जीवन का सार भी तुम हो ... मेरे जीवन में जो माधुर्य है न वो तुमसे ही तो है मेरे प्रिय ...जो कुछ भी है सब तुमसे ही है....
ये अहसासे मोहब्बत है ॥ तुमसे है हाँ तुम्ही से तो ... करार भी तुमसे ही आता है और बेकरार भी तुम ही कर जाते हो ...
कि गूँजती है तेरी मोहब्बत मेरे दिल की गहराइयों में स्वछंद होकर ...
क्रमशः
सीमा असीम
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