गीत
आज प्रिय ये क्या कह गए
मुस्करा के मन क्यों रह गए
नाचे अंग अंग बनके चंदनियाँ
ओ मेरा पिया ओ मेरा सावरिया
स्वर्ग सी धरती खिल रही है
दिल की दुआएं सज रही है
मेरा मन भी खिला दे
मेरा मन भी महका दे
ओ मेरा पिया ओ सावरिया
दिल में अरमा मचल रहे हैं
कोयल से कुहक रहे हैं
प्रीत की सरिता बहा दे
आँखों से नमी हटा से
मैं हुई यूं तेरी बावरिया
मैं महक रही हूँ लहक रही हूँ
झूम झूम कर आसमा छु रही हूँ
सजन दिल में छुपा ले
इस जग से बचा ले
ओढा दे वही धानी चुनरिया
सीमा असीम
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