अच्छा लगता है,,, भोले बाबा की पूजा करना,, उनका व्रत रखना,,जल चढ़ाना,,फल फूल दूध दही न जाने कितना कुछ ...लेकिन मैं सोचती हूँ कि अगर हमार मन पवित्र है कोई गलत भावना नहीं है तो ये व्यर्थ के ताम झाम की कोई जरूरत भी नहीं है ...
आज रिहर्शल .हाल में मन गुनगुना रहा था तो सोचा इसे पूरा सुनती हूँ घर आकर लेपताप ऑन किया सुन रही थी कि फोन आ गया ...
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हमें तुम से प्यार कितना, ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते तुम्हारे बिना हमें तुम से प्यार ... सुना गम जुदाई का, उठाते हैं लोग जाने ज़िंदगी कैसे, बिताते हैं लोग दिन भी यहाँ तो लगे, बरस के समान हमें इंतज़ार कितना, ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते तुम्हारे बिना हमें तुम से प्यार ... तुम्हें कोई और देखे, तो जलता है दिल बड़ी मुश्किलों से फिर, सम्भलता है दिल क्या क्या जतन करतें हैं, तुम्हें क्या पता ये दिल बेक़रार कितना, ये हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते तुम्हारे बिना हमें तुम से प्यार . हमें तुम से प्यार कितना, यह हम नहीं जानते मगर जी नहीं सकते तुम्हारे बिना हमें तुम से प्यार कितना ... मैं तो सदा की तुम्हरी दीवानी भूल गये सैंयाँ प्रीत पुरानी कदर ना जानी, कदर न जानी हमें तुम से प्यार कितना ... कोई जो डारे तुमपे नयनवा देखा ना जाये मोसे सजनवा जले मोरा मनवा, जले मोरा मनवा हमें तुम से प्यार कि
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