क्यों तेरी याद आती है
क्यों आँखों में नमी आती है
क्यों ये शाम ढलती है
दर्द इस कदर बढ़ता है
कि मानों जान जाती है
ये कैसी मोहब्बत है
कि तुम को खबर तक नहीं
उँगलियों पर दिन गिनती हूँ
पल पल में पल को गिनती हूँ
तू इतना भी मसरूफ़ न हो जानम
कि मेरी जान जाती है
ये कैसी मोहब्बत है
कि तेरी याद आती है
सनम तेरी याद आती है !!
सीमा असीम
क्यों आँखों में नमी आती है
क्यों ये शाम ढलती है
दर्द इस कदर बढ़ता है
कि मानों जान जाती है
ये कैसी मोहब्बत है
कि तुम को खबर तक नहीं
उँगलियों पर दिन गिनती हूँ
पल पल में पल को गिनती हूँ
तू इतना भी मसरूफ़ न हो जानम
कि मेरी जान जाती है
ये कैसी मोहब्बत है
कि तेरी याद आती है
सनम तेरी याद आती है !!
सीमा असीम
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