जिएंगे इस हाल में कैसे बरसों
मौत न आई क्यो आई तेरी याद
                  
मेरी धड़कनों में धड़कने वाले मेरे प्रिय तुम तो मेरी धड़कन में हर वक्त धड़क्ते हो ...मेरी उठती गिरती स्वांसों से सिर्फ एक ही आवाज आती रहती है ॥ तुम इतने दूर हो फिर भी इतने करीब कैसे रहते हो समझ ही नहीं पाती हूँ कि मैं तुम्हें छु सकती हूँ ॥बात कर सकती हूँ ,,,हर पल में .....लेकिन प्रिय मुझे मुसकराना पसंद है फिर ये कैसी उदासी है जो मुझे रुला देती है आँखों से छलकती रहती है ..मेरे दिल में रहने वाले मेरे प्रिय ये जरा सी मुस्कान और हमेशा का गम क्यों बन गया है ? सुबह होने से पहले या शाम होने के बाद ये इस तरह से उदासी क्यों अपना डेरा बनाए रखती है ...मानों तुम्हारे सीने से आता हुआ धुआँ मेरे सीने में घुट सा रहा है ॥ये कैसी अजीब सी घुटन है ...ये कैसी लबों पर दुहाई है प्रिय कि तुम मुझे यूं न सताओ ...बहुत ही मुश्किल होता है अपने दिल को समझाना ॥बहुत ही मुश्किल ॥लगने लगता है कि यह कैसा जीवन है जो मरण के समान है ...क्या अब मुझे यूं ही जीना होगा ,,,,,ये कैसा प्रेम है जो मुझे इतना तड़पाता है॥ रुलाता और मजबूर करता है मर जाने के लिए ....मेरे प्रिय मुझे इन अजीब से अहसासों से बचा लो /...क्योंकि इस तरह से एक दिन सबकुछ होगा लेकिन हम कहीं नहीं होंगे " मैं कहीं नहीं मिलूँगी ॥ मेरी जान जाती है इस तकलीफ में ...मेरे अहसासों में रहने वाले मेरे प्रिय ॥मेरे सनम, हो सके तो निकालो मुझे इन जानलेवा अहसासों से ...
नजरें उदास है निराश हैं सारे नजारे ,,क्रमशः 
सीमा असीम 

Comments

Popular posts from this blog

मुस्कुराना

याद