कविता
सुनो प्रिय मैंने सुना 
जो प्यार करते हैं
वे फूल बनते हैं या तारा
फूल महक बांटते हैं
हवाओं में घुल जाते हैं
सूख जाते हैं और फिर खत्म हो जाते हैं

जो प्यार करते हैं
तारा बनकर आसमान में चढ़ जाते हैं
फूल बने हैं या तारा
पास नहीं रहते
क्या ये सच है  ?
न न ये सच नहीं है॥
ये सच नहीं है प्रिय
हाँ वे पास नहीं रहते 
फिर भी दिल में रहते हैं 
हरदम साथ रहते हैं 
स्वासों में महकते हैं 
लब पर सजते हैं 
आँखों में बसते हैं 
हम तो तुमसे प्यार करते हैं 
हाँ हम भी तुमसे प्यार करते हैं !!
सीमा असीम

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