कहानी
सीमा असीम सक्सेना, बरेली
पहला सफर
यह शायद उनका पहला सफर था ! जैसे सुबह की पहली किरण चमकती है न धरा पर, तो सूर्य स्वयं
आनंदित हो उठता है धरा को चमकते हुए देखकर और फिर धरा की ख़ुशी की खातिर खुद को तपाता चला
जाता है, तेज से तेज प्रकाशित होता चला जाता है ताकि वह अपने प्रकाश से धरा के कण
कण को रोशन कर दे ! हाँ ठीक बिलकुल ऐसा ही तो लग रहा था उन दोनों को देखकर ! एक दूसरे
को रोशन करने के लिए स्वयं को तपाते हुए से !
काली पेंट, नीले रंग की
शर्ट, काले जूते और आँखों पर गोल फ़्रेम का चश्मा लगाये, उस खूब गोरे लड़के का
व्यक्तित्व कुछ अलग सा ही आकर्षण लिए हुए था ! उसके बराबर में बैठी लड़की, काले रंग
के फूलदार कुरते, प्लेन काली लेगिंग और काले रंग की चुन्नी में उस लड़की का चमकता गोरा रंग उसके व्यक्तित्व को और भी
बढ़ा
रहा था ! परन्तु वो लड़का जो आकर्षक व्यक्तित्व के
साथ ही अपने चेहरे पर एक टिकी हुई ग़जब की मुस्कान के साथ उस लड़की के चेहरे पर भी
मुस्कान लाने में कामयाब हो गया था ! और यकीं जानों वो प्यारी सी लड़की, छोटी सी मुस्कान के साथ ही गज़ब की खूबसूरत लगने लगी थी !
उसकी इस मुस्कान ने यह साबित कर दिया था कि मुस्कान ही हमारे चेहरे का
सबसे सच्चा गहना होती है ! वाकई उसको मुस्कुराते देखकर ऐसा ही अहसास हुआ था ! कहते
हैं न कि ख़ुशी हो या गम छुपाने से नहीं छुपता, जैसे इश्क और मुश्क की खुशबू खुद ही
फैल जाती है ! जब कोई मुस्कुराता है तो हमारे मन में भी ख़ुशी का संचार सा होता है
और ख़ुशी हमारे अंदर उर्जा का भंडार भर देती है !
वे दोनों धीरे धीरे, मुस्कुराते हुए, न जाने क्या क्या बातें किये जा
रहे थे ! मीरा
का जी चाह रहा था कि जाकर उनकी बातों में शामिल हो
जाये ! फिर उनके साथ
में खूब बतिआये, खूब मुस्कुराये, खिलखिलाएं ! पर वो ऐसा नहीं कर सकती थी आखिर सभ्य समाज की सभ्य लडकी है
और इस तरह का व्यवहार सभ्यता के खिलाफ कहा जाता
है ! आखिर हम जिसे जानते ही नहीं, उनकी बातों
में दखल कैसे दे सकते हैं !
यह बातें उसके सुसंस्कृत व्यक्तित्व के खिलाफ कही जाती
और फिर मन का क्या, वो तो कुछ भी सोचता है ! कोई हर बार मन की बात थोड़े ही न मानी
जाती है !
एक बार उससे रमा ने कहा था कि किसी भी इन्सान को पहली ही नजर में या
एक ही झलक में पहचान जाने का हुनर है उसके पास ! वाकई वो इस जोड़े को देखकर ही समझ
गयी थी कि दोनों प्रेम में हैं और अपने प्रेम की खातिर जीने मरने की स्थिति से भी
ऊपर जा चुके हैं !
वैसे इन्हें देखकर कोई भी बता
सकता था कि यह जोड़ा प्रेम में है ! तो कहाँ मानी जाएगी उसकी यह खूबी कि एक ही नजर
में देखकर उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व को पहचान जाती है, बस चरित्र को थोडा बरतने के
बाद ही ठीक से बता सकती है ! हालाँकि मीरा उसकी बात का विश्वास
तो नहीं करती किन्तु उसकी अच्छी सहेली होने के नाते वो उसे झूठ या गलत तो बिलकुल भी नहीं ठहरा सकती !
उस दिन वे दोनों अपने शहर से 100 किलोमीटर दूर दूसरे
शहर में एक वार्ता की रिकार्डिंग कराने आकाशवाणी जा रही थी
! हालाँकि
उन दोनों ही लोगों को कार चलाना आने बाद भी, कार को हाईवे पर चलाने में बहुत डर लगता है ! इसलिए जब भी शहर से बाहर
जाने का होता है तो ड्राइवर चाहिए या फिर वोल्वो बस का सहारा ! उस दिन भी वे दोनों वोल्वो में ही सफ़र कर रहे थे ! उनकी बराबर की सीट पर वो प्रेमी युगल बैठा हुआ था
जिनकी तरफ उन दोनों का ध्यान आकृष्ट हो जा रहा था और बस के अधिकाँश लोगों का मन उनकी तरफ ही लगा हुआ था यहाँ तक की
कंडक्टर भी टिकिट बनाने की जगह उन लोगों की तरफ़ अपना ध्यान केन्द्रित किये हुए था
! वैसे एक बात तो
है कि हम अगर बस या ट्रेन में सफर करते हैं तो
हमें अलग अलग तरह के ढेरों किरदार मिल जाते हैं !
मीरा, एक बात तो बताना जरा !
हाँ पूछो, !
यह जो प्रेम होता है न ! वो इतना सम्मोहित क्यों करता है क्योंकि जो
प्यार में हैं सो तो हैं ही बल्कि आसपास के लोग भी आकृष्ट हुए बिना नहीं रहते !
सही कहा तुमने ! प्रेम खिलता हुआ गुलाब होता है इसकी खुशबू खुद ब खुद
फैल जाती है, जलते हुए दिए की चमक सी इसकी चमक हर तरफ फैल जाती है ! यह प्यार नाम
की चिड़िया होती है न, इसकी हर किसी को तलाश तो होती है परन्तु यह सबके हाथ नहीं
आती और अगर आ भी जाए तो टिक नहीं पाती ! या तो लोग सहेज नहीं पाते या कोई एक
बेवफाई कर देता है और इस तरह एक प्यारे और बेहद खूबसूरत रिश्ते का अंत होने लगता
है ! पता है मासूम और नाजुक प्यार जरा सी चोट से घायल हो जाता है !
ओह्ह !! तो क्या प्यार को सहेजना और सभालना पड़ता है !
हाँ बिलकुल ! अन्यथा यह प्रेम नाम की चिड़िया कैद में खुद को असहज पाती
है ! उड़ने को बेताव हो पंख फडफडा कर कैद में ही दम तोडकर मुक्त हो जाती है !
तो फिर क्या करना चाहिए ? उसने जिज्ञासा से पूछा !
देखो, इसे प्रेम से सहेजते हुए ऊँची उडान देना जरुरी है ! प्रेम में
जीतने की कोशिश न करके हार जाना चाहिए ! उसे न खरीद करके खुद ही उसके हाथों बिनमोल
बिक जाना चाहिए !
अच्छा !
जैसे तुमने कभी पतंग देखी है न, उड़ते हुए आसमान में ! ठीक उसी तरह प्रेम
को पतंग समझ उसकी डोर बस हाथ में रखते हुए ढील देते रहना चाहिए ! जब लगे कि यह
कटने वाली है तुरंत अपना पूरा ध्यान उस पर लगाकर कटने या टूटने से बचा लेना चाहिए
! प्रेम को भी इसी तरह नेह भरी नजर से आवाद रखना चाहिए !
ओहो मेरी प्यारी सखी ! तुमसे ज्यादा जानकारी तो किसी प्रेम गुरु को भी
नहीं होती होगी !
हमेशा धैर्य का दामन थाम कर, मध्यम सी आंच पर धीरे धीरे पकाते हुए चाय की तरह चुश्की चुश्की लेकर पीना
चाहिए ! प्रेम में जितना झुकती जाओगी, उतना ही मीठा फल पाती जाओगी ! अपनी तारीफ
सुनकर वो और भी उत्साहित होकर बोली !
ठीक है मेरी प्रेम गुरु ! अब शांत हो जाओ !
मीरा मुस्कुराते हुए चुप हो गयी और उससे पूछा, एक बात तो बताना बहन, एक दिन
तुम कह रही थी न कि मैं एक नजर में देखकर ही बता सकती हूँ किसी के भी बारे में !
हाँ, तो ?
तो जरा यह बताओ कि यह जो जोड़ा बैठा है वो प्रेम की कितनी लम्बी दूरी
तय करेगा ! मतलब इनका भविष्य क्या है ? जैसे हर बात का एक समय या अवधि होती है न,
तो यह बताओ इनका प्रेम कितने समय से है और कितने समय तक रहेगा ! क्या लगता है इन
लोगों को देखकर ?
काफी पुराना प्रेम लगता है ! और अब यह दोनों प्रेमी ही नहीं बल्कि पति
पत्नी भी हैं !
नहीं, यह पति पत्नी नहीं हैं, इनका कोई सुहाग चिन्ह नहीं दिख रहा है !
सही कहा ! जैसे इनका कोई सुहाग चिन्ह नहीं दिख रहा, ठीक वैसे ही
इन्होंने सात फेरे भी नहीं लिए !
हम्म्म ! मतलब बिन फेरे हम तेरे !
ठीक पहचाना ! इन दोनों ने एक दूसरे को मानसिक रूप से पति पत्नी के रूप
में स्वीकार कर लिया है !
जिसे आज की भाषा में कहते हैं लिव इन रिलेशन !
नहीं नहीं, यह दोनों साथ में तो बिलकुल भी नहीं रहते ! हाँ अक्सर
मिलते जुलते रहते हैं !
रमा
बड़ी गहरी गहरी बातें कह दी तूने तो !
जो भी
कहा सच है ! विश्वास न हो तो जाकर पूंछ लो !
न बाबा न ! भाई मैं क्यों दखल देने जाऊं इन दोनों के बीच में !
बेचारे देखो, कैसे प्रेम में डूबे हैं ! और मैं उनके बीच में कवाब में
हड्डी बनकर पहुँच जाऊं !
उसने देखा लड़के ने अपना एक हाथ उस लड़की के कंधे पर और दूसरा उसकी
हथेली पर !
लड़की ने अपने दोनों हाथों से उसके हाथ को बड़ी हिफाजत से सभाल रखा था
और अपना सर उसके कंधें पर रखा हुआ था ! न दुनियां की फ़िक्र, न ही खुद की परवाह !
बस सुध बुध खोकर एक दूसरे में डूबकर अनमोल सा जीवन जी रहे हैं !
लड़के के चेहरे पर अभी भी हलकी सी मुस्कान है पर लड़की का चेहरा कुछ उतरा
उतरा सा है मानों वह रोना चाहती है !
यह दोनों अब बिछुड़ने वाले हैं ! खुद को एक दूजे में छोडकर अपने अपने रास्ते जाने वाले हैं ! मतलब अलग अलग ! रमा ने मीरा
के चेहरे को भांपते हुए कहा !
लड़की के चेहरे पर अथाह पीड़ा उभर आई है ! ऐसा महसूस हो रहा है जैसे
उसके भीतर कोई टीस सी उठ रही हो, और वह उसे दबाने की असफल कोशिश कर रही हो ! क्योंकि
यह अपना दर्द उसको नहीं दिखाना चाहती जिसे वह सिर्फ ख़ुशी देना चाहती है जिसे जी
जान से प्यार करती है ! उसे बिना बताए या अहसास दिलाये, दिन रात इन्तजार करते और जागते हुए बेचैनी में गुजार देती है !
जहाँ सच्चा प्यार होता है वहां पर मन सारे दुःख चुपचाप अकेले सहकर भी
उसे ख़ुशी देना चाहता है और खुद को बिना किसी हिचक के कुरबान या फ़ना कर देता है ! प्यार
में इन्सान ख़ुशी तो देता है पर दुःख नहीं ! दर्द तो वह अपने दामन में समेट लेता है
प्यार की सौगात समझ कर ! उसे गर्भ में पालता
रहता है ! प्रसव की सी वेदना सहते हुए विरक्त सा इधर उधर फिरता रहता है उचाट मन
लिए हुए ताकि अपने प्रिय को ढेर सारा प्यार दे सके ! वो तो हजार हड्डियों के टूटने
जैसा भयंकर दर्द में भी अपने प्यार को पल्लवित और पुष्पित करता रहता है ! उफ़ मैं कितनी पागल हूँ, न जाने यह क्या क्या सोचती रहती हूँ ? मीरा ने अपने सर को झटका और उसका ध्यान फिर से उन
लोगों की तरफ चला गया !
दोनों ने कसकर एक दूसरे के हाथ को पकडा हुआ था, लड़की की आँखों में
आंसू थे और लड़का उसकी पीठ पर ढाढस बंधाते, बिना कुछ कहे, अपने एक हाथ से हलके हलके
उसे सहला रहा था ! हम फिर मिलेंगे दूर जाकर भी या एक दूसरे से अलग होकर भी, न हम अलग होंगे, न
ही दूर होंगे ! जब हमारे मन प्राण एक हैं तो किसकी ताकत है जो हमें अलग कर सके ! तुम
हमारी नस नस में लहू सी बहती हो, दिल में धड़कन सी धडकती हो, तो खुद ही बताओ, तुम
दूर कैसे हो ? लड़के ने बहुत धीमी आवाज में कहा !
रमा, मीरा
को देखकर मन ही मन मुस्कुरा रही थी और वे उन लोगों की बातें ध्यान और
कान लगाकर सुनती जा रही थी, साथ ही कल्पनाओं के पर लगाकर उन लोगों के हाथ छूटाकर
एक दूसरे से दूर जाते देख रही थी ! बरबस ही उनकी आँखों से पानी बहने लगा ! क्यों हो जाते हैं जुदा? क्यों सहते हैं
इतना दर्द? क्यों रोते हैं और क्यों बहते रहते हैं आंसूं ? न जाने वो कौन सी अनजानी
डोर होती है, न जाने कौन सी जादूगरी कि हम न चाहते हुए भी इस डोर से बंधे रहना
चाहते हैं और हर हाल में बंधें रहने में ही अपनी भलाई समझते हैं और उसमें ही सुख
पाते हैं ! अचानक मेरी तन्द्रा भंग हुई, बस अचानक से रुक गयी थी ! देखा कि वह एक
कस्बेनुमा गाँव है !
बस सडक के किनारे रुकी हुई खड़ी थी ! शायद वहां पर बस स्टैंड नहीं होगा
! उस सड़क के दोनों किनारों पर ढेले सजे हुए थे, जिन पर मूंगफली, फल, चाट पकोड़ी और
छोटी छोटी मिठाई की दुकानें व चाय आदि के खोखें थे !
चाट के ठेले से तवे के तडकने की आवाजें, तली हुई आलू की टिक्किओं की
और प्याज के पकोड़ों की सोंधी सोंधी खुशबु मन को मोह रही थी और जीभ उसके स्वाद को
लेने के लिए लालायित होने लगी थी ! गर्मागर्म पकोड़ियाँ कढ़ाही के बराबर बड़े से
कर्छुल से निकलते हुए देख के मुँह में पानी आ जाना स्वाभाविक सा लग रहा था ! वैसे
आधा स्वाद तो आँखों से देख कर और नाक से सूंघकर ही ले लिया था !
क्या देख रही हो मीरा , अरे बोलो भी, इतना
चुप कैसे हो गयी ?
रमा यह सोच रही हूँ कि गावों में या छोटे शहरो में आज भी जीवन है और लोग
जीते भी हैं ! देखा जाए तो खाने पीने का असली स्वाद भी यहीं है !
सही कहा तुमने !
बस में एकाध सवारी चढ़ गयी थी और एकाध उतर गयी थी !
बस चल पड़ी ! मीरा ने देखा उसके बराबर की सीट पर जो लड़का लड़की बैठे हुए थे अब वहां सिर्फ लड़का बैठा
हुआ था ! लड़की यहीं पर उतर गयी थी !
ओह्ह ! मैंने उस सीन को मिस कर दिया ! फिर मन को समझाते हुए कहा, चलो
अच्छा ही हुआ कि उन लोगों को दूर जाते हुए नहीं देखा ! एक दूसरे से बिछुड़ते हुए भी
नहीं देखा ! मैं अभी भी यह भरम बनाये रखना चाहती थी कि वह लड़का अकेला नहीं है
बल्कि वो लड़की भी उसकी बगल में बैठी हुई है ! मीरा ने सोचा !
यह मन भी कितना पागल है, यह सोचकर वो मुस्कुरा दी !
लड़के के उदास चेहरे और छलकी हुई आँखों को देखकर उसकी मुस्कान उदासी में तब्दील हो गयी !
देखना यह थोड़ी देर में अपनी चिरपरिचित मुस्कान में लौट आएगा और इसकी
उदासी दूर हो जाएगी ! मीरा ने फिर अपने मन को समझाया !
रमा बहन, बस इतना बता दे कि इन दोनों का प्यार हमेशा यूँ ही बना रहेगा न ?
कहीं ज़माने की नजर तो नहीं लग जाएगी ?
इनका
प्यार कभी कम नहीं होगा बल्कि दिन पर दिन बढेगा !
ऐसा क्यों ?
क्योंकि यह लड़का बहुत समझदार और सज्जन है !
अच्छा प्रेम में समझदार होना भी जरुरी है ! मैंने तो सुना है प्यार
में सिर्फ दिल काम करता है दिमाग नहीं !
यह भी ठीक सुना है लेकिन अगर दोनों ही सिर्फ दिल से काम लेंगे तो कभी
भी प्यार ज्यादा दिन नहीं चल पायेगा !
लेकिन क्या तुम्हें पता भी है कि आजकल लोग प्यार को भी गेम की तरह
खेलते हैं मानों वो कोई शतरंज का गेम हो !
वे धोखेबाज होते हैं !
वैसे इन्सान को अपने दिमाग का भी थोडा काम लेना चाहिए !
नहीं, बल्कि मुझे तो लगता है कि एकदम नासमझ बनकर सबकुछ लुटा देना
चाहिए, और बर्बाद होकर जिन्दगी भर पछताना चाहिए !
सच्चा प्रेम एक बार मिलता है और जिन्दगी भी एक ही बार ! बाकी प्रेम तो
सब दिल्लगी होते हैं या खानापूर्ति !
ऐसे प्रेम को भुला देना बड़ा आसान होता है कोई फर्क नहीं पड़ता किन्तु
पहला प्रेम और सच्चा प्रेम कभी भुलाये नहीं भूलता !
तो फिर क्यों न पहले प्रेम को ही आखिरी प्रेम बना लिया जाए ! जिससे
कभी पछ्ताबे का अहसास ही न हो !
हाँ यह तुमने सही कहा ! क्योंकि प्यार दो दिलों का अनजाना सा रिश्ता
है और नफरत सुनियोजित तरीके से बनाया गया दिमाग का खेल !
मीरा की नजर चलती हुई बस के बाहर चली गयी ! दूर दूर तक उस लड़की का कोई चिन्ह
नहीं था फिर भी वो लड़का अपना हाथ हिला रहा था और अपने सर को खिड़की से टेक लगाकर अपनी
नजरें गडाए बाहर की तरफ ही देखे जा रहा था !
उसे यूँ देखकर ऐसा महसूस हो रहा था कि वो लड़की चली गयी थी खुद को यहाँ
छोडकर और इसे अपने साथ ले गयी थी !
जिस गन्तव्य तक पहुचने के लिए वे बस में सवार हुए थे, बस ने उन्हें उनके गन्तव्य तक पंहुचा दिया था ! वे दोनों नीचे उतर गयी
और उन
लोगों के साथ ही वो लड़का भी नीचे उतरा !
ऐसा महसूस हो रहा है रमा कि अभी हमें कुछ
दूर और साथ चलना है अभी हमारा साथ ख़त्म नहीं हुआ है !
फिर वे ऑटो करके आकाशवाणी केंद्र पहुच गए थे ! अब उन दोनों का ही साथ छूट
गया था ! इसके बाद भी वे दोनों ही अभी तक नजरों के सामने घूम रहे थे ! बिलकुल
अनजानों से यह किसा रिश्ता बन जाता है !
रेकोर्डिंग रूम में देखा वो लड़का वहां पर पहले से मौजूद है और कम्पुटर
पर काम कर रहा है ! एकवारगी तो नजरो का फेर लगा जैसे कोई भ्रम हुआ हो !
लेकिन यह भ्रम नहीं है !
यह लड़का शायद यहीं जॉब करता है ! यह सोचकर मीरा के चेहरे पर मुस्कान आ गयी ! अब रमा की सारी बातों का यथार्थ पता चल जायेगा !
यार आलोक, यह तो बता अब मैं तुझसे क्या मांगू, मिठाई या तेरे गम ? उस
लड़के से ऑफिस के एक कर्मचारी ने कहा !
अरे यार, ग़मों को तो मेरे पास ही सुरक्षित रहने दो ! तुम तो बस मिठाई खाओ और जिन्दगी के मजे करो !
अरे गम और मिठाई दोनों एकसाथ ? ये कोई पहेली सी लग रही है !
अभी कहानी तो शुरू हुई है, न जाने किस मोड़ पर जा कर रुकेगी !
नहीं इनकी कहानी नहीं रुकेगी ! जिसे रुकना था वो पहले ही रुक गया !
किसी महिला का फुसफुसाता सा स्वर कानों में पड़ा !
जब इतना ही प्रेम था मौसेरी बहन से तो फिर क्यों किसी और से ब्याह
रचाया !
अरे यह क्या है ? कहानी में झोल ही झोल !
अमीर एकलौती लड़की से पहले ब्याह करके उसके पैसों का हक़दार बन गया और अब मौसेरी बहन से बचपन के प्रेम की खातिर उसे घोट घोट कर मार दिया !
क्या प्रेम ऐसा होता है ? उनकी नजरें अनायास ही रमा की तरफ उठ गयी और रमा पहले से ही उसकी तरफ देख रही थी आँखों में अलग से भाव लिए हुए !
सीमा असीम, सक्सेना
बरेली
,, ९४५६०६४६९
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