सुनो प्रिय
घबराहट से भरी हुई मैं
अपनी आँखों को कसकर बंद कर
लेती हूँ
जब मुझे ये अहसास होता है
कि
तुम मेरे करीब नहीं हो
और यकीन मानों
मेरे आँख बंद करते ही
मैं महसूस करती हूँ
तुम्हारा साथ
पूरी पृकृति और संसार
सच बताना प्रिय क्या
तुम्हें भी ऐसा ही महसूस होता है
नहीं मेरे साथ कभी ऐसा
नहीं होता
वो कैसे
वो यूं कि तुम्हारे साथ
होने से या
दूर होने से मुझे कोई फर्क
ही नहीं पड़ता
क्योंकि तुम तो हरदम मेरे
साथ होती हो
मेरी नस नस में महसूस होती हो
ऐसा ही हमेशा होता है
तुम सच कह रहे हो न
हाँ सच
फिर गूंजी खिलखिलाती हुई हंसी हमारी
पूरी कायनात में !!
सीमा असीम
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