चंद शेर
मेरी बंदगी है तुझसे, रब भी तू है
करती हूँ सज़दा तेरा नाम लेकर !!
फितरत है गुलों की मुरझा जाने की
तबस्सुम की सजा तो मिलनी ही है !!
जब तन्हाइयों में पुकारती हूँ तुम्हें
तस्वीर से निकल सामने आ जाते हो !!
तोड़ कर देखो हजार बार आईना ए दिल
हर टुकड़े में नाम औ अक्स तेरा होगा!!
जब कभी जानना हो मोहब्बत ए सरूर
झांक लेना बस मेरी आखों में एक बार !!
धो धो कर पवित्र कर लेती हूँ अपनी आँखें
रखना है इनमें तुम्हें अपना देव बनाकर !!
सीमा असीम
मेरी बंदगी है तुझसे, रब भी तू है
करती हूँ सज़दा तेरा नाम लेकर !!
फितरत है गुलों की मुरझा जाने की
तबस्सुम की सजा तो मिलनी ही है !!
जब तन्हाइयों में पुकारती हूँ तुम्हें
तस्वीर से निकल सामने आ जाते हो !!
तोड़ कर देखो हजार बार आईना ए दिल
हर टुकड़े में नाम औ अक्स तेरा होगा!!
जब कभी जानना हो मोहब्बत ए सरूर
झांक लेना बस मेरी आखों में एक बार !!
धो धो कर पवित्र कर लेती हूँ अपनी आँखें
रखना है इनमें तुम्हें अपना देव बनाकर !!
सीमा असीम

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