तुम मिले दिल खिले
गतांक से आगे

रिया तू मुस्करा

तुम मिले  दिल खिले 


तुम सच ही तो कहते थे कि तुझे प्यार करने के अलावा कुछ भी नहीं आता ! कहाँ आता है कुछ और अब जाकर समझी हूँ यह बात ! सिर्फ प्रेम ही तो मेरा जीवन है तुमसे दूर रहूँ या पास रहूँ करती रहती सिर्फ तुम्हें ही प्रेम कोई जरूरी तो नहीं प्रेम करने के लिए दो शरीरो का पास होना, इसके लिए दो रूहों का होना ही काफी है ! तभी तो अब मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता ! या शायद पड़ता है इसीलिए तो छलक पड़ती हैं आंखे, बहने लगते हैं आँसू, घबरा जाता है दिल ! जी चाहता है उस वक्त तुम्हें अपने सीने से कसकर चिपका लूँ, जिससे मन की बेकरारी को करार आ जाये !
मेरी उदासियों को खुशी के पंख लग जाये और मैं खुले आकाश में तुम्हारे हाथों में हाथ डाले नभ को छु आऊँ या उस छितिज के भी पार निकाल जाऊँ, जहां हम मिलते रहते हैं अक्सर ! 
मैं खो जाऊँ तुम्हारी आँखों में और तुम मेरी आँखों मे और दिल यूं खिल कर मुस्करायेँ कि उस मिलन को देख देवता भी पुष्प वर्षा कर उठे लेकिन ख्याल रहे प्रेम रखना पवित्र मेरी ही तरह तप कर निखरा हुआ .......
मेरा प्रेम तो सिमट गया है सिर्फ तुम्हारे होने तक ही ।।

अदा है, हाँ गर ये अदा है 
लेकिन यह सच्ची वफा है
निखरा है तन मन 
तप कर प्रेम अगन में 
मेरी आँखों में झाँको 
मेरे दिल को देखो !!

क्रमशः ,,,,,,,
सीमा 

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