कहाँ दूर तुमसे
जब तुमसे दूर जाने का पल
करीब होता है
तब जी चाहता है
ठिठक जाये ये पल
न गुजरे ये लम्हा
तुम्हारी आँखों मे डूबते
उतराते ही व्यतीत हो जाये ये जीवन
क्या तुम्हें पता है
जब मैं तुमसे दूर जाने की सोचती
भी हूँ
जैसे बेढ़िया सी पढ जाती
हैं मेरे पावों में
हवाएँ तुम्हारी ओर खींचे
लिए चली आती हैं
एक साथ होना तुम्हारा मन
को इतना हल्का फुल्का कर देता है
कि बस आसमान में ही विचरता
रहता है
दूर होने के अहसास भर से
ही
ये मन भरा भरा सा हो जाता
है
मन चाहता है
तुम्हें इस तरह से मन में
बसा लूँ
कि दूर जाने पर भी क्षण भर
को भी
तुमसे दूरी का अहसास न हो
!!
सीमा असीम

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