आज हिन्दी दिवस पर (14 सितंबर )

वो कहते हैं न ...
निज भाषा उन्नति गहै
सब भाषा को मूल ....
मतलब किसी भी प्रकार की उन्नति या तरक्की हमारी अपनी भाषा से ही  सकती है  पर आज लोग ऐसा नहीं समझते वे तो इंग्लिश बोलना और पढ्ना अपनी शान समझते हैं जैसे कि आज हिन्दी दिवस है पर लोग बोलते है हिन्दी डे ! एक दूसरे को विश करेंगे तो भी कहेंगे हॅप्पी हिन्दी डे !!! कभी कभी तो सुनकर  बड़ी हंसी आती है और मैं सोचने को विवश हो जाती हूँ कि क्या इस तरह कि भाषा बोलने से हमारे देश की तरक्की होगी जिसे हमने हिंगलिश नाम दे रखा है ....

दरअसल हमरी पहचान तो हमारी भाषा से ही होती है जैसे कोई पंजाबी बोलता है तो पता चल जाता है कि वो पंजाबी है ...इसी तरह हर प्रदेश की अपनी कोई न कोई भाषा होती है और अपने अपने देश की भी कोई अंग्रेज़ है तो वो अङ्ग्रेज़ी ही बोलेगा ....इसी तरह हमारे देश की भाषा  है हिन्दी...इसे बोलने में हिचक कैसी ? हम  शान से क्यों नहीं कहते कि हम हिन्दी भाषी हैं ....
हिन्दी है हम वतन है हिंदोस्तान हामारा 
हिन्दी हमारी मात्र भाषा के साथ राष्ट्र भाषा व राज भाषा भी है !

देखा जाये तो हिन्दी अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है क्योंकि चीन के बाद भारत ही ऐसा देश है जहां की जनसंखा बहुत है और अधिकतर जगह हिन्दी समझी व बोली जाती है फिर केवल एक दिन हिन्दी दिवस मनाने के बजाय साल भर हिन्दी का गुणगान होना चाहिए। साल भर इस भाषा को प्रयोग में लाना चाहिए ! सच तो यह है कि देश में हिन्दी दिवस बनाने की जरूरत ही नहीं पडऩी चाहिए। हिन्दी के लिए यह बहुत बुरा दौर है, लेकिन सरकार व हिन्दी प्रेमियों के सहयोग से इस दौर को पीछे छोड़ा जा सकता है। सरकार को भी कुछ नियम बनाने होंगे ताकि हिन्दी की लोग उपेक्षा न करे  बल्कि प्रचार प्रसार में सहयोग करे !!!!


सीमा असीम


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