नज़्म
ओ सनम तेरा शुक्रिया
जो मुझे दर्दे ए दिल पहलू में दिया
कर के चाक चाक खून ए जिगर
तुझे खुशियों का उपहार दिया
सजा दिये फूल तेरी राहों में
काँटों सेअपना दामन भर लिया
दुनियाँ की रोशनियाँ मुबारक तुम्हें
तन्हाइयों से रिश्ता जोड़ लिया
तुम रहो यूं ही सदा खुशहाल
मैंने तो खामोशीयों को ओढ़ लिया
वफ़ा की राह पर कर दूँ निसार
दिल को दरिया ए दिल बना लिया !!
सीमा असीम

Comments
Post a Comment