आँख मे थी हया हर मुलाक़ात पर
सुर्ख आरिद हुए वस्ल की बात पर
हर खुशी मिल गयी काम ही कर गयी
आपसे जो मिले आपसे ही मिले
मुस्कुराई धरा चाँदनी खिल गयी
दूर जाते ही जो आँख नम कर गयी
साथ हो ही लिए आपसे जो मिले
थामी थी सनम तुम ने कलाई मेरी
हाथ मे हाथ था वो जिंदगी थी मेरी
कोई वादा नहीं फिर भी हम हैं तेरे
खुशी इतनी मिली संभाली न गयी
जान जाये भले अब परवाह नहीं
याद जाती नहीं तेरी आकर कभी
दुनियाँ ले ले भले लाख इम्तिहान मेरे
सांस से सांस मिल गयी जान आ ही गयी
जान आ ही गयी, जान आ ही गयी !!
सीमा असीम

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