रिया मुस्करा

न जाने कितने रूप होते हैं इन आँसूओं के, न जाने कितने रंग और न जाने कितनी भाषाएँ ! सच में हैरत में पड़ जाती हूँ जब खुशी से उछलते, चहकते  हुए भी आँखों से अश्रु छलक पड़ते हैं ,,,मन खुशी में भी नम सा हो जाता है ! मेरे प्रिय क्या यह वाकई सच है कि ख्वाब सच हो जाते हैं ? बिना किसी रुकावट के प्रकृति हमारा साथ निभाने लगती है और अंग अंग में उछाह का संचार हो जाता है ! बस यह एक ख़्वाहिश ही तो थी और वो सच हो गयी ! 
प्रकृति हमेशा खुशी देती है ....सच का साथ देती है .....
निर्मल मन जन सो मोही पावा .....वो ख्वाब जिसमें मैं दिन रात डूबी रहती हूँ ...एक ऐसा नशा जिससे कभी उबर ही नहीं पाती ,,,,और जीती रहती हूँ उन पलों को, जब हम साथ थे ......बर्फ से घिरे उस स्थान पर अब फूल खिल गए हैं प्रिय, मेरा प्रेम महक उठा है ...खुशबू बिखेरने लगा है ...प्रिय, क्या तुम मेरी धड़कनों के संग धड़कती इस खुशी को महसूस कर सकते हो ? खुशी से छलक्ती मेरी आँखों की भाषा पढ़ सकते हो ?
जी सकते हो न वही खूबसूरत पल कल्पनाओं में ?...
जहां न नफरत ॥न लड़ाई ...सिर्फ प्यार .....बेशुमार.....
दुआ में हाथ उठाकर खुशी तो आपकी मांगी थी फिर यह कैसी अनजानी अनोखी खुशी मुझे दे दी .....ओ रब तेरा शुक्रिया ....

फूलों के शहर में है घर अपना
जहां से नज़ारा देखा पर्वतों का......


क्रमशः

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