क्या जानु साजन होती है क्या गम की शाम
जल उठे सौ दिये जब लिया तेरा नाम
काँटों पे मैं खड़ी नैनों के द्वार पे
निश दिन बहार के देखूँ सपने
चेहरे की धूल क्या चंदा की चाँदनी
उतरी तो रह गई मुख पे अपने
जब से मिली नजर
माथे पे बन गयी बिंदिया तेरे नयन
देखो सजना
धर ली जो प्यार से मेरी कलाइयाँ
पिया तेरी उँगलियाँ हो गयी कंगना
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