गतांक से आगे
रिया तू मुस्करा
यह दर्द सहना आसान नहीं है, इस दर्द में जीना आसान नहीं है, वो दर्द जो मैं सह रही हूँ, पल पल में घुट घुट के जी रही हूँ ,असहनीय है यह पीड़ा ! यह मुझे इस कदर तड़पा रही है, बेतरह रुला रही है मुश्किल सा हो गया है जीना ! न जाने कैसे यह दे दिया तुमने मुझे ? क्या तुम्हारा दिल जरा भी नहीं दुखता, जब मैं रोती हूँ तो क्या तुम्हारी आँख से एक आँसू भी नहीं टपकता ? गुजार देती हूँ सारी रात यूं ही बिना पलक झपकाए तो तुम कैसे बेफिक्र नींद सो जाते हो ?
प्रिय मुझे इस दर्द में अपना थोड़ा सा सहारा दो, ताकि मैं इसे सह सकूँ ! जी सकूँ ! भले ही न खिलखिला कर हंस पाऊँ लेकिन मुस्करा तो सकूँ ! वे शब्द जो दिल चीर देते हैं दिल के पार निकल जाते हैं ! और दे जाते हैं इतना गहरा ज़ख्म, ज़ख्म के ऊपर एक और ज़ख्म ,जो बहुत टीसते हैं ! बहुत रुलाते हैं और छीन लेते हैं सारा चैन और सकूँ ! मेरे प्रिय तुम एक बार तो महसूस करो मेरा दर्द, मेरी तकलीफ तब शायद तुम्हें अहसास हो कि मेरा दर्द कैसा है ? क्यों है ?
मेरे आँखों के आंसुओं की पवित्रता को समझो ......क्या तुम कभी जान पाओगे इसके पीछे छिपे सच्चे प्रेम को ? महसूस कर पाओगे मेरा सच ? प्रिय सुनो, इस दुनियाँ की चमक दमक में भटकते हुए तुम, क्या मुझे इतना कमजोर असहाय कर देना चाहते हो कि मैं कभी उठ कर खड़ी भी न हो सकूँ ?
बन जाऊँ डूबता हुआ सितारा ? बोलो क्या तुम ऐसा ही चाहते हो ?
तुम देना साथ मेरा ओ हमनवाज,
न कोई है,
न कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा ......
सीमा असीम
क्रमशः
रिया तू मुस्करा
यह दर्द सहना आसान नहीं है, इस दर्द में जीना आसान नहीं है, वो दर्द जो मैं सह रही हूँ, पल पल में घुट घुट के जी रही हूँ ,असहनीय है यह पीड़ा ! यह मुझे इस कदर तड़पा रही है, बेतरह रुला रही है मुश्किल सा हो गया है जीना ! न जाने कैसे यह दे दिया तुमने मुझे ? क्या तुम्हारा दिल जरा भी नहीं दुखता, जब मैं रोती हूँ तो क्या तुम्हारी आँख से एक आँसू भी नहीं टपकता ? गुजार देती हूँ सारी रात यूं ही बिना पलक झपकाए तो तुम कैसे बेफिक्र नींद सो जाते हो ?
प्रिय मुझे इस दर्द में अपना थोड़ा सा सहारा दो, ताकि मैं इसे सह सकूँ ! जी सकूँ ! भले ही न खिलखिला कर हंस पाऊँ लेकिन मुस्करा तो सकूँ ! वे शब्द जो दिल चीर देते हैं दिल के पार निकल जाते हैं ! और दे जाते हैं इतना गहरा ज़ख्म, ज़ख्म के ऊपर एक और ज़ख्म ,जो बहुत टीसते हैं ! बहुत रुलाते हैं और छीन लेते हैं सारा चैन और सकूँ ! मेरे प्रिय तुम एक बार तो महसूस करो मेरा दर्द, मेरी तकलीफ तब शायद तुम्हें अहसास हो कि मेरा दर्द कैसा है ? क्यों है ?
मेरे आँखों के आंसुओं की पवित्रता को समझो ......क्या तुम कभी जान पाओगे इसके पीछे छिपे सच्चे प्रेम को ? महसूस कर पाओगे मेरा सच ? प्रिय सुनो, इस दुनियाँ की चमक दमक में भटकते हुए तुम, क्या मुझे इतना कमजोर असहाय कर देना चाहते हो कि मैं कभी उठ कर खड़ी भी न हो सकूँ ?
बन जाऊँ डूबता हुआ सितारा ? बोलो क्या तुम ऐसा ही चाहते हो ?
तुम देना साथ मेरा ओ हमनवाज,
न कोई है,
सीमा असीम क्रमशः
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