गतांक से आगे
रिया तू मुस्कुरा 

आपकी खुशी की खातिर मुझे चुप रहना रास आया !  खामोश रहना , खो जाना या डूब जाना बेहतर है उस उबरने से जो तुम्हें उदास कर दे या दुख दे क्योंकि मेरे लिए  यह  मायने  नहीं  रखता कि तुम मुझे क्या  दे रहे हो या क्या देना चाहते थे !

बल्कि मैं तुम्हें क्या दूँ या फिर शुरू से क्या देना चाहती थी तुम्हारे गलत कहने पर भी, समझने पर भी मैं तो आपको खुशी ही देती रही और देती भी रहूँगी क्योंकि मैं कमजोर नहीं हूँ बिलकुल भी कमजोर नहीं हूँ इतनी हिम्मत है मुझमें कि अपने प्यार को अपनी मोहब्बत को जता सकूँ उसका इजहार कर सकूँ लेकिन मैं आपको कमजोर, टूटा हुआ या हारा हुआ नहीं देख सकती किसी भी भी कीमत पर नहीं !


मैं खुश हूँ कि यह जहर मुझे रास आ गया
तुम संग ए दिल होकर भी उदास हो !!

क्रमशः
 

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