एक रंग
अब एक रंग में रंग गए हम दोनों
दूध औ पानी सा मिल गए हम दोनों
बहती जब हवाएं आती खुशबु हमारी
फूल और खूशबु सा रम गए हम दोनों    
मुझ पत्थर को छूकर पारस कर दिया
जन्नत में जीने लगें हैं हम दोनों
हारी मैं जीते तुम न कोई सौदेबाजी
जीत हार का जश्न मनाएं हम दोनों
भीग जाऊ मैं कितना भी गोते लगाकर
लहर और सागर सा बन गए हम दोनों
बुना जो ख्वाब हमने संग मिलजुल कर
हाथों में डाल हाथ जी जाएँ हम दोनों !!
सीमा असीम  

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