खिलखिला के हंस देती हूँ खुशी में 
तो गम में भी मुस्कुरा देती हूँ 
यूं ही तो नहीं झुकाती सज़दे मे सर 
क्यों  दुआ में  हाथ  उठा लेती हूँ 
तुमसे ही जिंदगी है अब मेरी 
हर हाल में तुझे गुनगुना लेती हूँ 
चूमती हूँ अपनी हथेली को बार बार 
और माथे से लगा लेती हूँ 
तेरी खुशी पे होकर निसार 
मैं खुद को भी मिटा लेती हूँ !!

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