मैंनें आँखों में भर लिया है प्रेम
मन में भर लिया है प्रेम
मेरी मनुहारों में भी है प्रेम
मेरी खामोशी में
मेरे दर्द में
मेरे दुख में
मेरे सुख में
मेरे उत्सव में
मेरे जीवन का सार तुमसे है
प्रिय मैं तुम्हारे प्रेम में हूँ
पर कमजोर नहीं हूँ
जलते दीपक के सामने जैसे
मोम पिघल जाता है वैसे ही
मेरा सारा साहस न जाने कहाँ चला जाता है
न जाने कहाँ चली जाती है मेरी खुद्दारी
मेरा अहम
बस बचा रहता है तो प्रेम सिर्फ प्रेम
लो तुम्हारे नाम का एहसास मन मे भरकर मैंने बिखेर दिये हैं
अपने घर की चौखट पर सफ़ेद पुष्प
जब बिखर जाये चाँदनी और चाँद पूरे तेज से चमकने लगे
तब तुम मुस्करा देना इन सफ़ेद फूलों की तरह
अपने सफ़ेद मोतियों से चमकते दांतों से
यहाँ मेरे चेहरे की चमक तब और बढ़ जाएगी
मैं लिखूँगी तब एक प्रेमगीत
सुन लेना आकर के प्रिय उसे तुम खवाबों में !!
सीमा
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