साजन मोरे नयनन में, सो पलक ढाप तोहे दूँ
न मैं देखूँ औरन को, न तोहे देखन दूँ !!

प्रिय साजन तुम तो मेरा विश्वास हो न .....पल पल में बस तुम्हें ही जी रही हूँ ....मुझे यह भी पता है कि तुम लाख कोशिश करो लेकिन मुझसे एक पल को भी दूर नहीं जा पाते हो ....तुम्हारी हर आती जाती स्वांस के मेरा नाम होता है .....मैं यूं ही तो बेचैन नहीं होती ......


अपनी छवि बनाई के जो मैं पी के पास गई
जब छवि देखी पीहू की तो अपनी भूल गई !!

जो मैं सोचती थी या हूँ वही सच है मैंने महसूस किया यूं ही तो पल पल में नहीं जीती हूँ तुम्हें....
......

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