रोम रोम तेरा नाम पुकारे

एक हुए दिन रैन हमारे 

हम से हम ही छिन गए हैं

नैनन से मिलके आए नैन हमारे !!

        हद नहीं है कोई, न कोई सीमा है, सब बेहद है, असीम है ! तुम नहीं छु पाओगे कभी उस हद को, न उस सीमा को क्योंकि असीम है, बेहद है मेरा प्यार !! हर जरूरत से परे ! न कोई मांग न ही कोई अभिलाषा ! यही सच है अगर तुमने महसूस किया होगा तो तुम भी समझते होगे ! इतना पवित्र अहसास है यह प्रेम का कि प्रिय आपका नाम लेने भर मात्र से ही मेरा मन झंकृत हो उठता है ! इसीलिए न दुनियाँ की खबर है न खुद का होश है ! सब छोड़ दिया और तपाने को स्वयं को कर लिया एकदम अकेला, तन्हा ! यह जानते हुए भी कि तुम साथ हो मेरे हर पल में, हर लमहे में ! तभी तो हमेशा ये हाथ दुआ में उठे रहते
हैं, तेरा सजदा करते रहते हैं और सुनो प्रेम में कुछ गलत या सही नहीं होता !!! क्योंकि यह तो प्रेम की बात है उधो ,,,,,,,, असीम

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