तुम पास हो या न हो क्या फर्क पड़ता है
इस दिल से जुदा होते ही नहीं तुम कभी
दिल तो बस दिल है दीवाना सा दिल है
टूट भी जाए तो भी क्या फर्क पड़ता है
हर टुकड़ा हीरे की मानिंद चमक उठता है
जुदा हो कर भी दिल जुदा होता न कभी
ये जो तराने हैं मोहब्बत के अफ़साने हैं
न कर सके जो वफा क्या फर्क पड़ता है
बेबसियों का अजीब आलम है कुछ ऐसा
सुलगता है ये दिल दर्द से भरा यह दिल
दुआओं में फिर भी हमेशा तेरा नाम लेता है
हूँ तो बस तेरी बाकी क्या फर्क पड़ता है
माना कि तुम सिर्फ हमारे थे कभी
रहते हो इस दिल में क्या फर्क पड़ता है!!
सीमा असीम
इस दिल से जुदा होते ही नहीं तुम कभी
दिल तो बस दिल है दीवाना सा दिल है
टूट भी जाए तो भी क्या फर्क पड़ता है
हर टुकड़ा हीरे की मानिंद चमक उठता है
जुदा हो कर भी दिल जुदा होता न कभी
ये जो तराने हैं मोहब्बत के अफ़साने हैं
न कर सके जो वफा क्या फर्क पड़ता है
बेबसियों का अजीब आलम है कुछ ऐसा
सुलगता है ये दिल दर्द से भरा यह दिल
दुआओं में फिर भी हमेशा तेरा नाम लेता है
हूँ तो बस तेरी बाकी क्या फर्क पड़ता है
माना कि तुम सिर्फ हमारे थे कभी
रहते हो इस दिल में क्या फर्क पड़ता है!!
सीमा असीम

Comments
Post a Comment