रिया मुस्करा
तेरा मेरा साथ रहे
तेरा मेरा साथ रहे
धूप हो छाया हो
दिन हो कि रात हो
न जाने कैसे और कब गुजर जाते हैं ये दिन, ये रातें कुछ पता ही नहीं चलता ! एक खूबसूरत सा नशा दिमाग में बसा रहता है जो बनाए रखता है दीवाना, नशे में चूर डूबी रहती हूँ उस अथाह प्रेम सागर में जिससे उबरने का कुछ और करने का ख्याल ही नहीं रहता ! सुनो प्रिय, क्या यूं ही तुम भी मुझे याद करते हो ? मेरे ख्यालों में खोते हो या कभी डुबकी ही लगाते हो ?वैसे इस बात का कोई फर्क भी तो नहीं पड़ता है क्योंकि मैंने तुम्हारा हाथ पकड़ रखा है और चलती चली जा रही हूँ अपनी ही धुन में मस्त उस दुरुह रास्ते पर, जहां हम साथ हैं हमेशा और हमारे हाथों में हाथ हैं ....ऊंचे नीचे ऊबड़ खाबड़ उस रास्ते को अब समतल करके, फूलों से महका दिया है .....प्रिय यह प्रेम ही तो है सिर्फ मेरा प्रेम और सिर्फ तुम्हारे लिए ....
प्यार की प्रीत की यूं ही बरसात रहे ....
क्रमशः
सीमा असीम

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