ओ रब
ओ मेरे रब मुझे ये बता क्या मैं सच में प्रेम पाशित हूँ
क्या है वो जो मेरे भीतर बहुत गहराई तक जो किसी फिल्म की तरह चलता रहता है
ऐसा क्या है जो टूटता है बिखरता है
और रुला देता है किसी बच्चे की तरह फूट फूट कर
या खुशी से कर देता है दीवाना जरा सी बात पर
कैसे छोड़ दिया है सब कुछ
न जाने क्या खिलता है मेरे मन के भीतर
न जाने कैसी घुटन होने लगती है अचानक से मुझे
कैसे उछलने लगते हैं यूं ही सबके सामने अल्हड़ की तरह
सिर्फ अपने प्रिय की खुशी की खातिर न्योछाबर कर देते हैं जहां की खुशियाँ
नूर सा बरस पड़ता है चेहरे पर
हीरे सा चमक उठता है तन मन
न जाने कहाँ चली गई है मेरी अक्ल
न जाने क्यों पागल दीवानी सी बनी फिरती हूँ
ताकती हूँ उस आसमां को जहां खिले हैं खुशियों के फूल
ओ रब गर मैं हूँ वाकई प्रेम में तो
हमें बस प्रेमी ही बने रहने देना मेरे प्रिय को सारी खुशियाँ देना
सह लूँगी सारी सजा अकेले ही
रो लूँगी ऐसे ही दुखी होकर
बस इस रिश्ते को कोई नाम न देना
हमें सिर्फ उसके प्रेम में ही रहने देना
हमें प्रेमी ही बने रहने देना !!
सीमा असीम
ओ मेरे रब मुझे ये बता क्या मैं सच में प्रेम पाशित हूँ
क्या है वो जो मेरे भीतर बहुत गहराई तक जो किसी फिल्म की तरह चलता रहता है
ऐसा क्या है जो टूटता है बिखरता है
और रुला देता है किसी बच्चे की तरह फूट फूट कर
या खुशी से कर देता है दीवाना जरा सी बात पर
कैसे छोड़ दिया है सब कुछ
न जाने क्या खिलता है मेरे मन के भीतर
न जाने कैसी घुटन होने लगती है अचानक से मुझे
कैसे उछलने लगते हैं यूं ही सबके सामने अल्हड़ की तरह
सिर्फ अपने प्रिय की खुशी की खातिर न्योछाबर कर देते हैं जहां की खुशियाँ
नूर सा बरस पड़ता है चेहरे पर
हीरे सा चमक उठता है तन मन
न जाने कहाँ चली गई है मेरी अक्ल
न जाने क्यों पागल दीवानी सी बनी फिरती हूँ
ताकती हूँ उस आसमां को जहां खिले हैं खुशियों के फूल
ओ रब गर मैं हूँ वाकई प्रेम में तो
हमें बस प्रेमी ही बने रहने देना मेरे प्रिय को सारी खुशियाँ देना
सह लूँगी सारी सजा अकेले ही
रो लूँगी ऐसे ही दुखी होकर
बस इस रिश्ते को कोई नाम न देना
हमें सिर्फ उसके प्रेम में ही रहने देना
हमें प्रेमी ही बने रहने देना !!
सीमा असीम

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