क्रॉसिंग पर बस के रुकते ही तीन-चार बच्चे उसमें चढ गए जिनकी उम्र तकरीबन 10 से 12 साल ही होगी अरुण सबके हाथ में कुछ ना कुछ बेचने की चीजें थी जैसे मूंगफली पॉपकॉर्न पापड़ हरा नारियल आदि, पापड़ पापड़ मूंगफली मूंगफली पॉपकॉर्न पॉपकॉर्न किस शोर मचाते हुए वह बस में उधर घूमने लगे एक दो लोगों ने ही कुछ सामान खरीदा बाकी वह ऐसे रंग लगाकर उतर कर नीचे चले गए, बस जल्दी फिर आगे एक स्टॉप पर रुके वहां भी इसी तरह से बच्चे समोसे मूंगफली आदि लेकर पीटने लगे आकर मैंने मन ही मन सोचा यह बच्चे सुबह से लेकर रात तक भेजते हैं कितने पैसे मिल जाते होंगे कोई तो खरीदा नहीं है मैंने ऐसे सोचती हुए एक बच्चे से मूंगफली के पैकेट खरीदें क्यों बेचते हो तुम लोग, कहीं पढ़ाई पढ़ाई क्यों नहीं करते आजकल तो स्कूलों में खाना भी मिलता है हां मैडम जी जरूर मिलता है लेकिन वह सिर्फ हमें तो मिलेगा और घर में हमारा छोटा भाई हमारी मम्मी वह क्या खाएंगे उनके लिए कमाने तो निकलना ही पड़ेगा ना पापा तो बैठे नहीं है कमाने को कहां गए पापा क्या हुआ पापा को पापा हुआ कुछ नहीं उन्होंने दूसरी शादी कर ली है क्या हालात है
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Showing posts from 2021
लघुकथा , अमरूद
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भैया अमरूद कितने रुपए किलो है ₹80 किलो वह चुपचाप बिना कुछ बोले वहां से हट गई और दूसरे ठेले पर पूछा भैया कितने रुपए किलो अमरूद दे रहे हो मैडम ₹80 किलो यह तो कमाल हो गया है सब कोई ₹80 किलो ही बेच रहा है हमारे शहर में तो सस्ता है कहीं ऐसा तो नहीं हमें दूसरे शहर का समझ कर इतना महंगा बोल रहे हो? कणिका ने कहा । नहीं नहीं मैडम जी आप कहीं भी पूछ लो आपको ₹80 मिलेंगे। अमरूद खाने का मन है तो लेने हीं पडेंगे, और ऐसे सोचते हुए वो बोली चलो ठीक है भैया 1 किलो दे दो। थोड़ा आगे आकर देखा तो एक बूढ़ी औरत अमरुद पूछ रही थी अम्मा अमरुद कैसे दिए? हमें कि उसे लेने तो थे नहीं वह तो ऑलरेडी ले चुकी थी और उसके मूल्य पता करने की वजह से पूछा ₹50 किलो हैं ले लो बेटा थोड़े ही बचे हैं । अरे ₹50 किलो और सब जगह तो ₹80 किलो है बेटा हम से तो कोई ₹50 किलो भी नहीं ले रहा है आप कहां से 80 रुपए किलो ले आई और मैं सोच में पड़ गई क्या वाकई उसने हमें दूसरे शहर का और गाड़ी देख कर उस अमरूद वाले ने हमें ठग लिया । सीमा...
रिक्शे वाला , लघुकथा
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सर्दी का प्रकोप बहुत ज्यादा बढ़ गया था, बहुत अधिक कोहरा पर गिर रहा था जिसकी वजह से उसकी 2 दिन से कोई कमाई नहीं हो रही थी वह रिक्शा लेकर जाता और वापस लौट के घर आ जाता था कोई सवारी मिलते ही नहीं थी जो भी सवारी होते थे या तो वह पैदल चली जाती होती थी या कोई अपने वाहन से रिक्शे पर बैठने वाली कोई सवारी मिली ही नहीं उसे, आज भी सुबह-सुबह वो भगवान का नाम लेकर अपना बैटरी वाला रिक्शा लेकर घर से निकल गया था आज अगर कुछ भी पैसा नहीं मिला तो कैसे करेगा काम धंधा चलेगा, घर का खाना पीना भी । अब तो घर में राशन भी खत्म होने लगा है छोटे बच्चे का दूध भी तो रोज ही लाना पड़ता है। हे भगवान आज एक सवारी मिला देना, रास्ते में चाय के ठेले पर लोग चाय पी रहे थे अंगीठी पर हाथ सेकते जा रहे थे । वहीं पर एक छोटी सी बच्ची चाय पी रही थी । उसने बड़े ध्यान से देखा, उसके पास एक बंद थी और एक बिस्किट का पैकेट भी था और एक कुल्हड़ में गरम गरम चाय । जरूर किसी ने तरस खाकर उसको दे दी होगी चाय बिस्किट आदि । मां बाप बच्चों को पैदा करके यूं छोड़ देते हैं और बच्चे ऐ...
तुम सिर्फ मेरे ही हो
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तुम एकदम सच ही तो कहते थे कि मैं तेरा हां हां सिर्फ तेरा ही हूं चाहे मैं यहां रहा हूं चल मैं वहां रहा हूं चाहे किसी के साथ बैठे हो क्या मैं किसी के साथ खड़ा रहूंगा चाहे किसी से बातें करो चाहे किसी के साथ मुस्कुराओ चाहे मैं किसी के साथ फोटो खींचा हूं चाहे मैं किसी के साथ घूमने जाऊं लेकिन मैं हूं तेरा ही हां तुम बिल्कुल सच कहते थे मुझे यकीन हो गया तुम सिर्फ मेरे ही हो। क्योंकि तुमने ही तो कहा मैं तेरा हूं तेरी मुस्कान में हूं मैं तेरे आंसुओं में हूं तेरे ह्रदय में हूं तेरे रग रग में हूं तेरे खून में हूं। जहां रहेगी तू, बस मैं वहां हूं प्रत्यक्ष रूप से नहीं हमेशा अप्रत्यक्ष रूप से। मैं सिर्फ तेरा और तेरे साथ ही हूं । तू कभी भी अपने को अकेला मत समझना । जब तू दुखी होगी तो मैं तेरे आंसू में बह लूंगा, जब तू खुश होगी तो मैं तेरी मुस्कान में रहूंगा। तू कहीं भी रहेगी मैं तेरे साथ रहूंगा । तू कभी आजमा मैं तेरा ही हूं तेरे साथ हूं और सदा सदा तेरा ही हूँ। आज मेरा विश्वास पक्का हो गया कि कभी भी तुम किसी और के हो ही नहीं सकते किसी के भी...
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इसलिए बस अभी कुछ दिनों पहले ही एक छोटा सा स्टोन लगाना शुरू किया था उसके फूड स्टॉल पर सूट चाऊमीन मोमोज चिल्ली पोटैटो फ्राइड राइस मिलते थे एक बार कोई खा ले तो दोबारा जरूर खाने आता था क्योंकि उसका स्वाद ही बहुत अच्छा था खुश थे वह दोनों भाई चलो घर का काम अच्छे से चल जाएगा जिस दुकान के सामने उसने छोटा सा स्टॉल लगाया था उसे हर दिन 500 रुपए देने होते थे मैं सोचा चलो कुछ तो बचेंगे उससे घर का खर्चा चलेगा इतनी मुश्किल हो गई थी नौकरी के छूट जाने से जब लॉकडाउन लगा तभी नौकरी चली गई और मजबूरन है स्टॉल लगाना पड़ा ।
सेंटा
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सेंटा के कंधे पर टंगे हुए थैले में खूब सारी टाफीयां भरी हुई थी वो थैले में हाथ डालता और वहां पर खड़े हुए बच्चों को एक-एक टॉफी पकड़ा देता और फिर डांस करने लग जाता, शहर की सबसे मशहूर दुकान के बाहर तीन चार व्यक्ति सेंटा की ड्रेस पहने खड़े हुए थे एक सेंटा के थैला पहने था उसमें टॉफियां और छोटे-मोटे खिलौने आदि रखी हुई थी,, बाकी दो केवल डांस कर रहे थे, बच्चे बड़े बूढ़े सभी लोग वहां पर आकर इकट्ठे हो गए थे, और अपना हाथ चलाकर सेंटा से मांग रहे थे टॉफिया खिलौने, सेंटा अपने थैले में हाथ डालता और एक दो बच्चों को टॉफी खिलौने आदि देता बाकी फिर बाकी बच्चे ऐसे ही खड़े हो देखते रह जा रहे थे, लेकिन लोगों की भीड़ वैसी की वैसी बनी हुई थी शायद इस आस में कि अगली बार उन्हें भी एक टॉफी मिलेगी। सीमा असीम
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ना जाने किस दुविधा में पड़ी रहती हूं ना जाने मैं क्यों सब कुछ सोचती रहती हूँ जबकि जानती हूं मैं खूब अच्छे से समझती हूं मैं तुम तुम मेरे ही हो चाहे कहीं पर भी रहो रहोगे सिर्फ मेरे ही न किसी के बारे में सोच पाओगे न कभी तुम विचार पाओगे मैं जानती हूं कि मैं हूं सदा तुम्हारे ख्यालों में मैं हूं सदा तुम्हारे विचारों में मैं हूँ सदा तुम्हारी बातों में मैं हूँ सदा तुम्हारी यादों में जब कहीं किसी से बात करोगे करोगे सिर्फ मेरी ही बातें मुझे पता है मैं तुम्हारे दिल में रहती हूँ धड़कनों में धड़कती हूँ मेरा नाम तुम्हारी जुबां पर है तो तुम जाओ कहीं भी या रहो कहीं भी हो तुम मेरे ही सीमा असीम
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मौसम तो बहुत सर्दी हो रही थी आज थोड़ी सी धूप निकली थी तू सोचा चलो बाजार के कुछ काम कर लिया जाए थोड़ी सामान खरीदा करके जरूर तुम्हीं से खरीदी और वापस आने के लिए गाड़ी में बैठे ही रहे थे की सामने एक ठेले पर फ्रूट चाट बिकती हुई दिख गई तो सोचा चलो थोड़ा सा खा लेते हैं मूवी फ्रेश हो जाएगा गाड़ी में रख कर के पास पहुंच गई और उसे का एक प्लेट बनाकर दे दो बस उससे इतना ही कहा था कि वहां पर तीन-चार छोटे-छोटे बच्चे पैसे मांगने के लिए आगे दीदी हमें भी खिला दो दीदी हमें भी खिला दो कहकर वह सब हमारे आसपास खड़े हो गए भी करीब चार पांच बच्चे थे और सब 8 से 12 साल की उम्र के ही थे फ्रूट चाट वाला बड़ी तल्लीनता से अपनी चाट बनाने में लगा हुआ था और भी बच्चे की तरह देख रहे थे और उस चाट की तरफ, मैं बहुत असमंजस में थी क्या करूं यह सब बच्चों को फ्रूट चाट खिलाओ या फिर मैं इन लोगों को पैसे दे दो चलो एक ऐसे रखो तुम सब मिलकर चार्ट खा लेना अभी ऐसा कहकर मैंने उन बच्चों के हाथ में 120 का नोट पकड़ा दिया, उन बच्चों की शादी फ्रूट चाट वाला वाला आप लोग इन बच्चों को पैसे देकर ही तो इनकी आदत खराब कर रहे हो ए क्यों कोई ...
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ना जाने कौन सा सुख ना जाने कौन सी खुशी ना जाने कौन सा आराम मिला होगा उसे यू मुझे सता के यूँ मुझे रुला के यूं मुझे दुःख देकर कैसे खुद से नजर मिला पा रहा होगा वह कैसी खुशी मना पा रहा होगा वह कैसे आती होगी उसके चेहरे पर मुस्कान क्या उसका दिल नहीं घबराता होगा क्या उसे सकुं की नींद आ जाती होगी क्या उसकी बार-बार आंख नहीं भर आती होगी क्या उसकी आँखों के सामने किसी फिल्म की तरह वे चित्र नहीं चलते होंगे जो गुजारें हैं हमने साथ साथ लेकर हाथों में हाथ अभी साथ-साथ खाते हुए कभी साथ-साथ बतियाते हुए कभी सुख शांति से एक दूसरे को देखते हुए कभी बहुत दूर यात्रा पर जाते हुए कितने पल कितनी यादें कितनी सारी बातें मुलाकातें दिल से दिल जब जुड़ जाता है तो आत्मा से रिश्ता बन जाता है लाख कोशिशों के बाद भी कभी टूट नहीं पाता है जिस पल भी मेरी आंख में आंसू आते हैं उस पर उसकी आंखों से भी आंसू बहते होंगे सुनो तुम मुझसे अलग नहीं हो तुम मुझे मैं हूं ...
प्रेम
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सुनो अब मुझे तुमसे प्रेम करने के लिए तुम्हारे होने की जरूरत नहीं है क्योंकि मैंने प्रेम किया है कोई व्यापार तो नहीं किया कि मैं तुम्हें प्रेम करूं और तुम भी बदले में मुझे प्रेम दो काश तुमने भी किया होता प्रेम तो तुम ऐसा सोचते तुम मेरी परवाह करते मेरा ख्याल रखते मेरे रोने पर रोते मेरे हंसने पर हंस देते पर सुनो तुमने तो प्यार नहीं एक खेल किया था खूब खेला और जब जी भर गया तो छोड़ दिया बिना इस बात की परवाह किए कि जो तुम्हें प्रेम करती है जो तुम्हारे प्रेम में है क्या होगा उसका वह कैसे जियेगी कि वह कैसे सांस लेगी वह कैसे रहेगी उसकी आंखों के आंसू कभी सूखेंगे क्या उसके चेहरे पर कभी मुस्कान आएगी कभी वह फूलों को देख कर खिल खिलाकर हंस पाएगी कभी वह सूरज को देखते हुए नमन करेगी या कभी चंद्रमा की तरफ नजर उठाकर देखेगी और उसके दिल में शीतलता आयेगी... सीमा असीम शायद नहीं है ना अगर सोचा होता तो तुम यूं ना करते कभी ना करते ऐसे ना करते निभाते तुम हर हाल में निभाते.... सीमा असीम
तुम मेरे
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मैं हर पल तुम्हें याद करती हूं मैं हर पल तेरा नाम लेती हूं क्या तुम्हें एहसास नहीं होता यहां मेरी आंखों से आंसू जब बहते हैं जरूर तेरी आंखों में नमी आती होगी जरूर तू भी ऐसे ही उदास होता होगा मेरी ही तरह उदास उदास निराश लगती होगी तुझे भी दुनिया सुनी सुनी कहीं कुछ अच्छा नहीं लगता होगा होता होगा तू भी भरी महफिल में अकेला मेरा नाम लेकर तू भी पुकारता होगा कैसे गुजरते हैं मेरे साँझ ओ शहर दिन रात रोम रोम तेरा नाम बुलाता है जानती हूं पूरा विश्वास है मुझे कि तुम मेरा है सिर्फ मेरा जैसे मैं हूं तेरी सिर्फ और सिर्फ तेरी सीमा असीम
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तू जो बताता फिरता है गैरों को उनकी औकात अब तेरी औकात सबको समझ आने लगी है तू क्या है जान गये हैं सब गिर चुका है शायद तू खुद की ही नजरों में इसलिए ही सबसे मुँह छुपाये बैठा है लूटता है जी भर के लोगों को तू करके बर्बाद अपने खोल में घुस जाता है औ बेगैरत इंसान कितना उड़ाया तूने फ्री का माल समझ कर क्या तुझे पता भी है कि तेरे कर्मो का फल तुझे मिलेगा जरूर फिर कहाँ मागेगा पनाह किस के दर पर अपना सिर पटकेगा तुझे कोई कहीं भी सकूं नहीं आयेगा जब तेरा दिल बेचैन होकर तड़पेगा इस तङप में तङप तङप मर जायेगा बिना जमीर का इंसान तू मुझे क्या सता रहा देखना एक दिन ईश्वर तेरा क्या हश्र बनायेगा मेरे दिल को न जाने क्या हुआ है जो इन बातों को महसूस करता है लिखता है शायद यहीं सच हो जाये...
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तुमने अकेले ही फैसला लिया और लागू कर दिया क्या तुमने सोचा कभी की रिश्ता एक तरफा नहीं होता जब रिश्ता तो तरफ से है तो फैसला भी दो तरफ से होना चाहिए जब जज भी फैसला करता है तो वह दोनों पक्षों की सुनता है पहले फिर वह कोई अपना फैसला सुनाता है तुम कोई ईश्वर तो नहीं हो जो तुमने जब चाहा जिसे चाहा मार दिया अपनी खुशी के लिए कोई सिर्फ तुम्हारी ही खुशी तो मायने नहीं रखती ना दूसरा जो तुम्हारे साथ रिश्ते में बंधा है क्या उससे एक बार भी नहीं पूछा जाता उसकी खुशी के बारे में उसके सुख के बारे में उसके दुख के बारे में जब किसी को मौत की सजा दी जाती है ना तो उससे भी उसकी राय पूछी जाती है और सबसे पहले तो मौत क्यों दी जा रही है उसकी वजह भी बताई जाती है ऐसा नहीं होता की बंदूक उठाई और गोली से उड़ा दिया क्या तुम जानते हो किसी के खून करने की सजा क्या होती है ऐसी सजा जो तुम्हारे कर्म के आधार पर प्रकृति तुम्हें देती है क्योंकि कुदरत का भी एक कानून होता है और कुदरत कभी किसी को माफ ...
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दर्द की इंतिहा हो रही है अब रात की नींद दिन का चैन खो रहा है अब तुम्हें मेरे रोने पर भी हँसी आती है पुकारता है आवाज देकर दिल मेरा अब कुछ अहसास तुम्हें भी होता तो होगा नहीं तो यूँ बेकरारी न होती मुझे अब आ जाओ आना ही पड़ेगा तुम्हें कैसे हो तुम मुझे बताना पड़ेगा क्यों कर इतने सितम कर रहे हो जीते जी मरने को छोड़े दे रहे हो आओ देखो जरा हाल मेरा मेरे ही हो तुम सिर्फ मेरे ही इतना तो समझ ही लो अब असीम
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तुम करते रहे मेरी बुराइयां कभी इससे कभी उससे कभी किसी से भी पर सुनो मैंने तो तुम्हारी बुराई उससे भी नहीं की जो तुम्हारी बुराइयां मुझसे आकर करते थे बस यही फर्क है दोनों में तुम झूठे थे हमेशा और मैं सच्ची और सच्चे से तो हर कोई डरता है इसलिए तो तुम मुझे बुरा भला कहते थे अगर तुम सच्चे होते तो तुम कभी भी ऐसा नहीं करते...
दुआ
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हंसते चेहरे को रुलाने वाले दर्द से सारी रात जगाने वाले कहां बदलेंगे तेरी आदतें चाहे कुछ भी हो मगरूर खुदा के खौफ से भी ना डरने वाले एक दिन तो तेरी अकल में सब आएगा देख उस दिन तू हाथ मलता रह जाएगा कुछ भी बचा नहीं होगा तेरे पास में इस आह का कोई तो अंजाम आएगा अपनी सहूलियत से हर रिश्ते को निभाने वाला तेरा मुक़द्दर ही तुझे धोखा दे जाएगा कब तक तू दूसरों को बुरा खुद को भला कहेगा भला मेरे दर्दे दिल को कभी तो आराम आएगा एक ही पल में दुनिया को उजाड़ने वाला तेरा हर आसरा एक दिन गुजर जाएगा दिल में सिर्फ दुआ ही दुआ थे तेरे लिए कुछ दिल को तड़पा कर सताकर रुलाने वाले एक दिन तू भी मेरे दर्द से बेजार हो जाएगा मांगता फिरेगा पनाह चारों तरफ तू एक बूंद पानी को तरस जाएगा यह दुआएँ अगर कबूल करेगा मेरे ईश्वर तो मेरा दिल और भी तड़प जाएगा वो जैसा भी है है तो मेरा ही वो जरूर एक दिन यह बात समझ आएगा.... सीमा असीम
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अगर तुम दर्द की कीमत समझते अगर तुम जानते कि दर्द क्या होता है तो तुम कभी भी दर्द नहीं देते इतना बेतहाशा दर्द कि अगर जान भी निकल जाए तो कम है लेकिन तुम कहां समझोगे तुम कैसे जानोगे भला? तुम तो अपनी खुशी में खुश होना अपनी दुनिया में खुश, एक बात याद रखना तड़पती हुई आत्मा की आह निकलती है तो वह सात समुंदर पार जाती है सारे आसमानों को चीर के रख देती है, तू अपनी आवाद दुनिया में खुश है ना, देखना तेरी दुनिया आवाद नहीं रहेगी ....
सिर्फ मेरे हो तुम
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हां याद करती हूं तुम्हें तुम भी वहां याद करते होगे मुझे मेरा तो रोम-रोम पुकार ने लगता है तुम्हारा नाम जरूर तुम भी मुझे आवाज देते होगे वहाँ पल पल प्रतिपल सिर्फ तुम्हारा ख्याल तुम्हारा नाम और कुछ भी नहीं ऐसे दुनिया में हो कर भी दुनिया की नहीं मैं जैसे कभी यूँ ही याद करते रो लेना कभी यूं ही याद करके मुस्कुरा लेना कितनी मधुर स्मृतियां है हमारे तुम्हारे बीच कई जन्मों तक याद करती रहूंगी फिर भी पूरी नहीं होगी इन स्मृतियों में खोकर कब गुजर जाते हैं दिन रात कई जन्म भी गुजर जाएंगे यूं ही पहाड़ों की ऊंची नीची गोल घुमावदार सड़कों पर चलते हुए कितने ख्वाब बुने थे हमने कभी हाथों में हाथ डाल कभी आंखों में आंखें डाल तुम्हारा वह मुस्कुराता हुआ चेहरा तुम्हारा कभी नाराज हो जाता हुआ गुस्सा करता हुआ वह चेहरा कुछ भी तो नहीं आंखों से दूर जाता मेरे पल भर को भी शायद तुम भी यूँ ही याद करते होगे मुझे किस सिर्फ अकेले में ही नहीं चल रही हूं इस बिरहा की अगन में ...
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दिलबर के सोने के बाद भी मन को शांति नहीं मिलेगी मन में बहुत सारी बेचैनी बहुत सारी तड़क-भड़क रही थी तो क्या करे खुद को खत्म कर ले लेकिन क्या खत्म करने से समस्याओं का समाधान होगा जीते जी जो चीजें हम सही कर सकते हैं क्या मरने के बाद हम कर सकते हैं वरना तो चने के झाड़ पर में मर सकते हैं लेकिन जो मरने के बाद तकलीफ है परेशानियां हमारे साथ रहेंगे उसे रोक नहीं पाएंगे कैसे पाएंगे तभी उसने अपनी आंखों को बहते हुए आंसू को हाथों से पूछा और उठ कर खड़ी हो गई रोना तो किसी भी समस्या का समाधान नहीं है बल्कि हम अपनी आंखों को रो-रो कर खराब कर लेते हैं उसके बाहर आई और राज के पास जाने के पहले कदम उसी तरह पढ़ा दिए देखा आज खाना खाने के बाद उसका हाथ धो रहे हैं जाना ही पड़ेगा बात करनी ही पड़ेगी आखिर वो राज के बिना कैसे रहेगी रास्तों उसकी जान है
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गौर से देखने पर पता चलता है कितना भयानक है इस झूठी दुनिया का सच्चा चेहरा, मैं बेतहाशा डर जाती हूं घबरा जाती हूं और सोते से उठकर बैठ जाती हूँ दिल तड़प जाता है मेरा, बेतहाशा आँसू बहते हैं और चैन नहीं आता,, समझ नहीं आता क्या करूं? क्यों है दुनिया का ऐसा चेहरा, क्यों किसी के दिल में जरा सर दर्द नहीं होता, इतने मतलबी इतने स्वार्थी इतने धोखेबाज क्यों है दुनिया में लोग? हे ईश्वर मैं जानना चाहती हूं, मुझे बताओ? क्यों धोखा करते हैं लोग? क्यों किसी के साथ छल करते हैं लोग? क्यों किसी को लूट लेते हैं लोग? क्यों किसी को बर्बाद कर देते हैं लोग? क्या उन्हें रत्ती भर भी एहसास नहीं होता है? क्या उन्हें कोई भी तकलीफ नहीं होती? क्या उन्हें कोई भी सजा नहीं मिलती?क्यों आखिर क्यों?
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मोहित ने उस लड़की को देखा और मानो जैसे उसकी तपस्या पूरी हो गई उसका ध्यान गुरु ग्रंथ साहिब की तरफ नहीं था उसका ध्यान तो सिर्फ उसका कि की तरह ही था और वह आया भी इसी वजह से ही ठाकुर द्वारे में वरना शायद ही गुरुद्वारे में आता और आता भी तो किसी भी समय आकर मत्था टेक कर चला जाता है ऐसे नियम से सुबह या शाम दोनो टाइम शायद ही आता क्योंकि वह तो कभी मंदिर तक नहीं गया मम्मी कितना कहती रहती हमेशा मंगलवार का व्रत रख लो मंगलवार को मंदिर चले जाया करो लेकिन कभी भी नहीं गया और आज यहां पर अचानक से उसके मन में श्रद्धा पैदा हो गई शायद उस लड़की को देखकर ही मन में श्रद्धा जागृत हुई और जब मन में श्रद्धा जागृत हो जाती है तो सब कुछ बहुत अच्छा लगने लगता है सब कुछ एकदम सच्चा लगने लगता है एक मन में लगन पैदा हो जाती है एक भाव पैदा हो जाता है एक तरीके से मन जागृत हो जाता है जो मन सोया पड़ा होता है वह जागृत अवस्था में आ जाता है उसके साथ भी ऐसा ही तो कुछ हुआ आरती होने के बाद में प्रसाद बांटा गया और प्रसाद लेकर मत्था टेककर हूं बाहर आ गया कि अभी तक बिल्कुल खामोश थी उसके साथ में एक दो लड़कियों और भी थे लेकिन वह किसी से बो...
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आज भी नींद आंखों से गायब हो चुकी थी, दूर-दूर तक कहीं नींद का नामोनिशान नहीं था, ना जाने अब कैसे नींद आएगी? क्या करूं नाज़मा को जगा लूँ? नहीं नहीं रहने दो बेचारी अभी तो सोई है, क्या करूं? चलो म्यूजिक सुनती हूं मन को सुकून आएगा, मोबाइल पर यूट्यूब ऑन किया और रिलैक्सिंग म्यूजिक लगा दिया, मेरे ईयर फोन कहां है? बिना ईयर फोन के सुनूंगी तो यह सब लोग भी जग जायेंगी, ओ हो अब यह फोन कहां ढूंढू? लाइट भी ऑन नहीं कर सकती, हां हिना के ईयर फोन यहीं बेड पर ही पड़े होंगे, वही लगा लेती हूं वह अभी गाने सुन रही थी ना ईयर फोन लगाकर, उसने हाथ से टटोलकर देखा, तकिए के नीचे ही उसके ईयर फोन पड़े हुए थे, मोबाइल पर ईयर फोन लगाकर उसने म्यूजिक ऑन कर दिया, अनुष्का शंकर का सितार वादन वाला म्यूजिक मन को बड़ा सुकून और आराम दे रहा था फिर पता नहीं कब नींद आ गई पता ही नहीं चला...
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तुम्हारी हंसी ------------------------- न जाने कितना छुपा होता है दर्द हमारी हंसी में हमारी मुस्कान में जहां मर्म है संवेदना है वहां हंसी भी है। हम हंसते हैं मुस्कुराते हैं तो चमकने लगता है हमारा चेहरा जैसे धुला-धुला सा बिल्कुल साफ और पवित्र। ऐसी ही है तुम्हारी हंसी भी तुम जब हंसती हो खिल जाता है जैसे तुम्हारा पोर-पोर तुम्हारे चेहरे की खाल को पतला कर देती है तुम्हारी हंसी तुम्हारी मुस्कुराहट। जब हंसती हो तुम परिंदे जैसे उड़ने लगते हैं आसमान में खुशी से। तुम्हारी धिमि हंसी तुम्हारी धिमि मुस्कुराहट लगती है बिलकुल नरम, मुलायम जैसे डूबी हो ओस की नमी में। आंखें गीली-सी हो जाती हैं खुशी से जब तुम हंसती हो खिलखिलाकर बिल्कुल पागलों-सी तब हंसी जैसे थिरकती रहती पल भर वहीं पर तुम्हारे आसपास। कभी तुम्हारी हंसी तुम्हारी मुस्कुराहट स्वतः स्फूर्त होती जैसे निःसृत हो रही हो तुम्हारे भ...
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मैं तुम पर बहुत ज्यादा विश्वास करती हूं हद से ज्यादा कोई एक बात भी अपने मन में नहीं रखती सारी बातें मैं तुमसे कह देती हूं दिल में कुछ रहता ही नहीं है मेरे तुम्हारे सिवा कुछ यहां तक कि जो भी बात मुझसे कोई कुछ कहता है वह भी मैं तुम्हें बता देती हूं मैं कभी कुछ तुमसे छुपाना ही नहीं चाहती मैं बार-बार तुम्हें जताना चाहती हूं लेकिन जब तुम मेरे विश्वास को ठेस पहुंचाते हो उसे झूठ बोलते हो कोई भी एक बात वह चीज मुझे रुलाती रहती है बरसो बरसो दिन रात सुबह दोपहर जब भी वह चीज भी रहती है दिल में और वह मुझे रुलाती है कि तुमने मुझसे झूठ बोला..मुझे सच भी तो कह सकते थे हर बार वही झूठ को अधूरा ना बार-बार उसे झूठ को कहना इतनी सफाई के साथ कहना मैंने तो तुमसे कभी कोई सफाई नहीं मांगी तुम अगर मुझे कोई बात बता भी रहे हो तो सच बताओ झूठ बताने का क्या मतलब बनता है उसे छुपाने का क्या मतलब बताएं मैं तो तुमसे पैसे भी हमेशा ही तुम्हारी हूं तुम्हें प्रेम करती हूं हद से ज्यादा करती हूं कोई नहीं कर सकता इतना तुम्हें प्रेम पवित्र और सच्चा प्रेम उसमें नाम मात्र को भी कोई मिलावट नहीं है प्रेम में इतना पारदर...
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घर पर बात हो जाने से मन में संतुष्टि का भाव आ गया था ना अभी तो बहुत फिक्र लगी हुई थी कि घर पर सब परेशान हो रहे होंगे खैर अब बात हो गई तो अब जाकर आराम से हम सो सकते हैं क्योंकि सोनू अगर नहीं सोएंगे तो अगले दिन उठ नहीं पाएंगे और हमारी थकान कम नहीं होगी बिस्तर पर लेटते ही नींद में आकर बसेरा डाल दिया और हम गहरी नींद में सो गए आंख सुबह 6:00 बजे के करीब खुली तो देखा पहाड़ों से दूर छन छन के हमारी टेंट के अंदर आ रही है मैंने उसके बाहर निकल आई जब मैं इतनी दूर आई हूं तो इस प्रेशियस को क्यों ना महसूस किया जाए और यहां के वातावरण को क्यों ना महसूस किया जाए आंखों क्यों ना जिया जाए केवल हम देखने के लिए सोने के लिए आराम उठाने के लिए तो नहीं आए थे ना सूर्य देव भगवान पहाड़ों पर आराम से उतरते जा रहे थे मानव पहाड़ ऊपर अधूरे नीचे आ गया हो नदी की कलकल की आवाज कानों में आ रही थी सामने ही तो नदी है कितनी सीट मिली थी टेंट और सड़क के उस पार नदी बीच में नदी ही थी थोड़ा सा नीचे उतर कर जाओ तो सड़क को पार करके जा और नदी सामने दिख रही थी अभी तो खैर नहीं नदी हम थोड़ी देर बाद जाएंगे थोड़ा धूप निकल आए और अच्...
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सनम तुम न करना कभी बेवफाई मुझसे भले ही पिला देना जहर का प्याला क्योंकि नहीं जी पाऊँगी मैं बिन तुम्हारे या होकर तुमसे जुदा मैं कि हूँ मैं सिर्फ ही और तुम्हें मानती हूँ सिर्फ अपना हाँ तुम मेरे ही हो सिर्फ मेरे तभी तो चलती हैं हमारी स्वांस साथ साथ धड़कती है धड़कन साथ साथ और हो तुम मेरे जैसे ही जैसे मैं बन गयी हूँ तुम्हारे जैसी... सीमा असीम
सावन
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कल फिर रोया सावन तड़प तड़प के रोया तुमने जी दुखाया बिन बात के सताया कितना समझाया पर मन समझ नहीं पाया सोते हुए जगते रोया खाते रोया पीते रोया मचल मचल के रोया तरस तरस के रोया मजबूर था दिल के हाथों किसी भी हाल दिल न बहला आंखों के प पोटे सूज गए लाल लाल गालों पर बहती रही लंबी लंबी धार बिखर गए थे बाल चारों तरफ जिस्म हो गया बेजान जार जार बिस्तर से तन को उठाया ना गया हाल मन का किसी से छुपाया ना गया बेदर्दी निर्दई जालिम क्या सुख पाया तूने सता कर रुलाकर तड़पा कर प्यास एक की तक तो तुझ से पूछा या ना गया दुनिया भर में तू बरसता फिरा तब भी तू रह गया प्यासा का प्यासा मुझसे भी कहीं ज्यादा तरसता तड़पता मचलता हुआ सीमा असीम
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जिंदगी की राहों पर चलना सिखाए इंसानियत का पढ़ाई पाठ और चीन सिखाएं धैर्य धर्म-कर्म का पाठ पढ़ाते हुए हर मुश्किल में हर कठिनाई में बस मुस्कुराना सिखाएं डग डग पर हो उसका साथ परछाई की तरह रिश्ता निभाएं सम्मान के साथ जिसके आगे झुक जाए बार-बार सर बस वही श्रेष्ठ गुरु कहलाये सूर्य से ऊर्जा होश में और चांद से शीतलता अंबर सा विस्तार है उनमे नदी की सी निश्छल कल कल कल कल गुरु की गरिमा से बड़ा नहीं कोई और ना उससे बड़ा कोई आकाश है मन में रखो विश्वास सच्ची भक्ति ही कर देगी बेडा पार
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करीब 6 महीने से घर से बाहर हम लोगों झाँके नहीं थे. कभी लॉकडाउन कभी कोरोनावायरस और कभी लहर बस इन्हीं सब चीजों के बीच झूल रहे थे और डिप्रेशन का शिकार हो रहे थे घर से बाहर निकल पाना भी एक बहुत बड़ी त्रासदी है एक ही कमरे में बैठे गाना तेरा ना सोचते रहना न जाने कितने बुरे बुरे ख्याल आगमन को परेशान करते रहते हैं थोड़ी देर को घर घर से बाहर जाने को मिले थे शायद ना कर दो पेशंट कम हो जाए ऐसा यह सोचते सोचते कितना दिन निकल गए थे आखिर हम लोगों ने करीब 10 महीने के बाद एक प्लान बना लिया घूमने का हमारा पसंदीदा प्रदेश हिमाचल प्रदेश यह पिक अभी कहीं घूमने जाने का प्लान बनता तो हम लोग हिमाचल प्रदेश जाने का ही प्लान बनाते हैं कि वहां की हरियाली वहां की वादियां और वहां की हवाएं शुद्ध हो मतलब तुम होती और मन को तरोताजा भी करती और फिर ऐसे माहौल से निकल कर जा रहे थे तब तो फ्रेश एयर में जाने के लिए सबसे अच्छा जगह अगर कोई है तो हिमाचल प्रदेश ही लगी मुझे हालांकि हम लोग उत्तराखंड भी जा सकते थे घर के करीब भी है उत्तराखंड लेकिन वहां पर आईटी पीएसी की रिपोर्ट लेकर जानी थी और भी बहुत सारे झंझट है जबकि हिमाचल ...
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मैं सच में जानना चाहती हूँ हाँ समझना चाहती हूँ कि तू ऐसा क्यों है ? क्यों झूठी बातें करता है और खुद की नजरों में ही गिर जाता है बार बार वही हरकतें जाहिलों की तरह ,,, हद है वाकई हद है , अब तो सुधार जाओ आखिर कब तक करोगे यह सब ? कभी तो तुझे समझना चाहिए । कोई तुझे बदनाम कर रहा है अपनी नजरों से गिरा रहा है फिर भी तू उसी के पीछे लगा हुआ है । तुझे कोई फर्क नहीं पड़ता होगा लेकिन उनके बारे में तो सोचा कर जो तुझसे जुड़े हुए हैं और जो तेरे अपने हैं कितना दुख होता होगा उन लोगों को तेरी इन गिरी हरकतों की वजह से । आज फिर रवीना ने माधव को डांटते हुए कहा । यह जानते हुए भी कि इसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा यह ऐसा ही रहेगा क्योंकि इसकी तो आदत ही पड गयी है यही सब करने की बस वह रो धो कर और चीख चिल्ला कर खुद को दुख पहुंचा कर शांत हो जायेगी और पहले की ही तरह इसकी देखभाल और परवाह करने लगेगी ।
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मेरी आँखों में भरे हुए यही आँसू तेरी बेवफाई की दास्तां कहते हैं तू गिरा औऱ गिरता चला गया शर्म की एक लकीर भी नहीं चेहरे पर तेरे तू क्या समझता है कि तू अपनी गिरी हरकतों से दुनिया जीत लेगा अरे बेशर्म तू खुद को न जीत पाया हर बार हारता ही रहा औऱ बेशर्मी को इज्जत समझता रहा अब तू जा चाहें कहीं भी जा नहीं करुँगी तेरी परवाह न तेरी कोई इज्जत मेरी नज़र में रही अब
खुशबु
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ना हो फूलों में खुशबू अगर तो फूल मन को भाते नहीं बिना खुशबू के फूलों का कोई मतलब बनता नहीं जब होती है फूलों में खुशबू भवरे आते हैं जाते हैँ बैठते हैं थोड़ी देर सुस्ताते हैं खुश होकर ऊंची उड़ान भर कर चले जाते हैं आती हैं तितलियां घूम घूम कर फूलों पर नाचती इतराती है फूलों से खुद मोहित हो खुद भी रंग रंगीले रंगों में रंगी जाती हैं अच्छी रंगत देखकर हर पक्षी आता है अपने गान सुनाता है खुश होकर पूरे उपवन में मडराता है फूलों की खुशबू आने से सारी खुशियां होती हैं बिन खुशबू के फूलों की कोई बात नहीं होती खुश्बू किसी हाल जुदा नहीं होती फूलों से फूल हैँ तो खुश्बू है खुश्बू है तो फूल.. सीमा असीम 30,6,21
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हँस कर बोला करो कुछ बताया करो तुम मेरे हो न हक़ जताया करो बहुत खुशियाँ हैं जिंदगी के दामन में कभी मुझ पर लुटाया करो हार क्या जीत क्या मैं नहीं जानती प्रेम की राह पर साथ चलते जाया करो चल रही आज देखो कितनी प्यारी हवा संग संग गुनगुनाया करो मुस्कुराते बीत जाये यह उम्र मुस्कुराने की वजह बन जाया करो.... सीमा असीम
मेरे हो
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दिल रोता है तो रोने दो आँखों से आँसू बहने दो न करो गिला न शिकवा शिकायत करो बस मोहब्बत करो सिर्फ मोहब्बत करो तुम सच्चे हो तो मेरे हो झूठे हो तो खुद के हो मुझे सच रहना है आजीवन मरना भी है अब सच रहकर तुम मिलते हो तो अच्छा है गर न भी मिले कोई फर्क नहीं एक बात कहूँ तुमसे जाना तुम भी कहाँ खुश होते होंगे मुझे जरा सा दुःख देकर भी दिल कहता है मेरा इस छ्ल कपट की दुनिया में एक तुम सच्चे हो तुम मेरे हो हाँ मेरे हो सच में मेरे ही हो... असीम
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जहां तक हम सोचते हैं तो बस अंदाजा होता है कि हमारी दुखों का कारण कोई दूसरा नहीं बल्कि हम खुद होते हैं क्योंकि हम दूसरों से अपेक्षा रखते हैं उम्मीद रखते हैं ढेर सारी ख्वाहिश रखते हैं सपने पाल लेते हैं कि यह सब कुछ पूरा कर देगा बस यहीं पर हम धोखा खा जाते हैं हम हमारी उम्मीद है हमारी ख्वाहिश है हमारे साथ में कोई दूसरा कैसे पूरा कर सकता है उसे तो हमें खुद ही पूरा करना होगा ना उसके लिए तो हमें ही कोशिश करनी होगी ना, हमारा मन कोई अपना नहीं पढ़ सकता चाहे वह कितना भी अपना हो नहीं समझ सकता हमें वह सिर्फ अपने मन को पड़ता है अपनी खुशी के लिए जीता है और अपनी ख्वाहिशे सपने उन सब को पूरा करने की दिशा में प्रयास करता है बस यही कारण है कि हम अपेक्षित हो जाते हैं हम महसूस करते हैं कि वह हमारी उपेक्षा कर रहा है और अपने ख्वाबों को पूरा कर रहा है लेकिन गलत सोचते हैं बिल्कुल गलत सोचते हैं वह तो वह कर रहे हो उसका दिल कर रहा है जिससे उसके दिल को खुशी मिल रही है वह हमें खुश करने के लिए खुद को दुखी नहीं कर सकता ना इंसान जब इस दुनिया में आया था अकेला आया था अकेला जाना है तो खुद को ही जीना है और खुद को ही म...
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मेरी आत्मा में उठता हुआ दर्द तुम तक जरूर पहुँचता होगा तभी तो बहते हैं मेरे आँसू और लगातार बहते जाते हैं,,, यक़ीनन जितना तुमने मुझे रुलाया है उससे कई नदियों भर गयी होंगी या शायद कई समुन्द्र भी क्योंकि यह आँसू बहुत मीठे थे अब खारे लगते हैं... काश तुम समझ जाते कि प्रेम क्या होता है पर तुम कहाँ समझोगे भला? तुम्हें कहाँ होती है कोई परवाह अगर होती तो कभी यूँ शब्दों के तीर न चुभाये होते न कभी यूँ मुझे रोने तड़पने दिया होता... तुम ऐसे क्यों हो बताओ मुझे क्यों तुम इतने मस्त हो हर्फ़न मौला? कि तुम्हें जरा भी दर्द नहीं होता है... तुम्हें भी हो जाये मोहब्बत सच्ची तो समझ आयेगा सब कुछ अभी तक तो हुई नहीं न अगर होती तो कभी यूँ न करते तुम?
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अब मैं तुम्हें नहीं पढूंगी कि पढ़ती हूँ ज़ब भी तुम्हें मुझे दुःख होता है बेपनाह दर्द जिसे मैं किसी हाल संभाल नहीं पाती हूँ... दर्द से बेहाल हो मैं न जी पाती हूँ और न कुछ कर पाती हूँ... तुम तो मुझे हमेशा से दुःख देते आये हो, हर बार तुम मुझे ऐसे ही तो रुलाते हो और तड़पाते हो फ़िर भी मैं आ जाती हूँ लौट लौट कर तुम्हारे पास,, जानती हूँ अब तुम्हें अच्छे से कि तुम उचश्रनखल हो,, तुम्हारा कोई दीन ईमान नहीं है तुम खुद की नजरों में भी गिर चुके हो बस जी रहे हो इसलिए ऊँची ऊँची हाँकते हो आखिर तुम ऐसे क्यों हो जरा सी फिसलन पर फिसल जाते हो, ज़ब देखो तब गिरी हरकत पर उतर आते हो, कभी meri भावनाओं की कद्र ही नहीं तुम्हें... हैरत होती है तुम्हारी इंसानियत पर क्या तुम अब इंसान भी नहीं रहे... क्या तुम्हारे दिल में कोई भाव ही नहीं हैं? बेदिल बेभाव के शख्स,,, तुम जी कैसे पाते हो? मुझे शर्मिंदगी है कि तुम मेरे अपने हो,, ऐसे अपने जिसे मेरी जरा भी परवाह नहीं... लेकिन सुनो मुझ गरीब को सता कर तुम भी खुश नहीं रह पाओगे... क्योंकि एक गरीब की आह सात आसमां के पार जाती है.. किसी को मत सताओ मत दो इतने दुःख दर्द और तकलीफ ज...
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जीवन क्या है जब हम दुनिया में आते हैं लोग कितने खुश होते हैं मां बाप भाई बहन इतने सारे रिश्ते नाते बनते चले जाते हैं हम अपनी आंखें खोलते हैं दुनिया को देखते हैं दुनिया बहुत प्यारी लगती है एकदम नया नया सब कुछ जीवन को जीने की इच्छा मन में शक्ति है उछलते कूदते बड़े होते चले जाते हैं पढ़ लिखकर बुद्धिमान बनते जाते हैं यार जैसे जैसे दुनिया को देखते जाते हैं वैसे-वैसे बनने की कोशिश करते हैं हमारे मन में छल कपट प्रपंच जाने क्या-क्या झूठ सब शामिल होता चला जाता है हमारे निश्चल तरह एक होती चली जाती है फिर धीरे-धीरे करके हम अपने गृहस्ती परिवार में मगन हो जाते हैं अपने मां-बाप जिनको हम जिन्होंने में पैदा किया वह हम उनको ना हम देखते हैं ना सुनते हैं बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपने मां-बाप का भी सहारा बनते हैं फिर वह अपनी गृहस्थी में मगन होते हैं अपने बच्चों के साथ में खुश रहते हैं बच्चे बड़े हो जाते हैं अपने पांव पर खड़े हो जाते हैं और फिर 1 दिन हम इस दुनिया को छोड़ कर फिदा हो जाते हैं खत्म हो जाता है सब कुछ सब कुछ यहीं से हमने पाया होता है और यही सब छोड़ जाते हैं जो ब्रह्मांड में खड़ा क...
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कहते हैं वहां पर बहुत मुश्किल से मिलती है मोहब्बत अगर मिल जाए तो समझती नहीं है इसलिए कोशिश करनी चाहिए मोहब्बत को ज्यादा जोर से मत पकड़ो और ढील भी मत दो क्योंकि ढील देने से वह बिछड़ जाती है और कस के पकड़ने से घायल हो जाती है तो प्रेम को बस प्रेम से सहेजे रखो लेकिन उसने तो डील भी नहीं दी और कस कर भी नहीं पकड़ा फिर ऐसा क्या हुआ और फिर एक बार बिछड़ जाए दूर चला जाए फिर का मिलना मुश्किल है तभी तो उसके जाते ही मौसम बहुत खराब हो गया था मुझसे मिलने के लिए आया वे लेकिन मौसम को शायद मंजूर नहीं था और उसका मिलना संभव नहीं हो पाया हाथों से भगवान पर ही सहारा था अगर वह मिला ही नहीं तो मिल जाएगी नहीं तो हमारी कोई भी कोशिश काम नहीं आने वाली क्योंकि प्यार मोहब्बत इश्क इश्क किस्मत से मिलते हैं यह किस्मत के खेल होते हैं कितनी ही दिन गुजर गए ना तो उसमें जॉब शुरू की और ना ही उसने थिएटर ज्वाइन किया हां बस कोचिंग क्लास जरूर शुरू कर दिए थे अब बस एक यही ख्वाब रह गया था कि किसी तरीके से कंपटीशन निकालना है और किस डिपार्टमेंट में सरकारी ऑफिसर की जॉब करनी है
सजा
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तुम्हारी बातों से मन सुखी हो जाता है तुम्हारी बातों से मन दुखी हो जाता है जब मन है मेरा तो मेरी बातों से सुखी होना चाहिए मेरी बातों से दुखी होना चाहिए तुम्हारी बातों से क्यों हो तुम अगर मेरे होते तो तुम मुझे दुख नहीं देते कभी दुख देने की कोशिश नहीं करते मुझे बार बार धोखा नहीं देते हो सकता तो सुख देते लेकिन तुम हमेशा मुझे एक नया दुख खोज कर देते हो और मैं उस दुख में डूबी रहती हूं गम में गहरे उतर जाती है कोशिश करती हूं निकलने की बहुत भयंकर कोशिश करती हूं तो कभी उस दुःख से बाहर निकल आती हूं तो कभी उस दुःख से निजात पा जाती हूं लेकिन सुनो मैं कभी मुस्कुरा नहीं पाती भूल गयी हूँ मैं जैसे मुस्कुराना और इसका कारण हो तुम तुम मेरे दोषी हो तुम्हें क्या सजा दूँ मैं यही सजा कि तुम भी इन दुखों में मेरे सहभागी बने रहो.... सीमा असीम 26,2,21
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चांद को देखना एक तक देखते जाना घटते बढ़ते और 16 कलाओं से परिपूर्ण होते जाना कितना सरल है ना चांद को देखना चांद की पवित्र चांदी में नहाई धरती पर अपनी परछाई को पकड़ने की कोशिश करना छोटी बड़ी आड़ी तिरछी लंबी नाटी परछाई को पकड़ कर अपने गले से लगाने की कोशिश करना सरल है ना परछाई को नापना इतना ही सरल तो है बस तुम्हें पढ़ना और सिलसिलेवार लिखते चले जाना चाँद का आसमां में मुस्कुराना सीमा असीम 23,2,21
फुहार
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क्या तुम्हें बारिश ही पसंद है अगर हाँ तो कौन सी? तूफान वाली मूसलाधार या फिर हौले हौले रिमझिम फुहारों वाली रिमझिम फुहारों वाली ना जब हम झूलते हैं बैठ के झूले पर सावन गाते हैं और फुहारों में भीगते जाते हैं तो बरसों ने रिमझिम बहारों की तरह हौले हौले मध्यम मध्यम ताकि मैं झूल सकू झूला रिमझिम रिमझिम पडती बारिश की फुहारों के बीच... सीमा असीम 22,2,21
कमाल
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कभी कमाल सा लगता है और कभी लगता है अजूबा एक बार ख्याल में लाओ या जिसको एक बार सोच में लाओ उस तक हमारी आवाज कैसे पहुंच जाती है वह कैसे समझ जाता है हमारे मन की सारी बातों को जो हम उसे कहना चाहते हैं वह भी और जो छुपाना चाहते हैं वह भी होता है ना ऐसा हां बिल्कुल होता है यही तो है कमाल यही तो अजूबा मन से मन की बात कहने का सीमा असीम 18,2,21
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भगवती विंध्यवासिनी आद्या महाशक्ति हैं। विन्ध्याचल सदा से उनका निवास-स्थान रहा है। जगदम्बा की नित्य उपस्थिति ने विंध्यगिरिको जाग्रत शक्तिपीठ बना दिया है। महाभारत के विराट पर्व में धर्मराज युधिष्ठिर देवी की स्तुति करते हुए कहते हैं- विन्ध्येचैवनग-श्रेष्ठे तवस्थानंहि शाश्वतम्। हे माता! पर्वतों में श्रेष्ठ विंध्याचलपर आप सदैव विराजमान रहती हैं। पद्मपुराण में विंध्याचल-निवासिनी इन महाशक्ति को विंध्यवासिनी के नाम से संबंधित किया गया है- विन्ध्येविन्ध्याधिवासिनी। श्रीमद्देवीभागवत के दशम स्कन्ध में कथा आती है, सृष्टिकर्ता ब्रह्माजीने जब सबसे पहले अपने मन से स्वायम्भुवमनु और शतरूपा को उत्पन्न किया। तब विवाह करने के उपरान्त स्वायम्भुव मनु ने अपने हाथों से देवी की मूर्ति बनाकर सौ वर्षो तक कठोर तप किया। उनकी तपस्या से संतुष्ट होकर भगवती ने उन्हें निष्कण्टक राज्य, वंश-वृद्धि एवं परम पद पाने का आशीर्वाद दिया। वर देने के बाद महादेवी विंध्याचलपर्वत पर चली गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि सृष्टि के प्रारंभ से ही विंध्यवासिनी की पूजा होती रही है। सृष्टि का विस्तार उनके ही शुभाशीषसे हुआ। विश्व की एक मात्र ख...
प्रेम
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जहाँ प्रेम है वहाँ सुख है ख़ुशी है जहाँ सुख है ख़ुशी है वहाँ है प्रेम प्रेम क्षणभंगूर नहीं अनंत काल की यात्रा है एक जीवन में कहाँ पूरा होता है प्रेम न जाने कैसे कर लेते हैं लोग छोटे से जीवन में किसी से घृणा प्रेम नफ़रत और जरा देर में बदल लेते हैं अपनी भावनाओं को वो कब समझेंगे क्या होता है प्रेम न कहने से न सुनने से अहसासों की भाषा है यह आत्मा से आत्मा का मिलना है प्रेम फूल इंद्रधनुष बारिश ओस देख मुस्कुरा देता है मन भोला भोला मासूमियत से भरा होता है प्रेम प्रेम करते हैं सभी जीवन में एक बार जरूर जो निभा ले सच्चे मन से वहां ईश्वर बन जाता है प्रेम!! सीमा असीम
बर्फ़
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यूँ तो निकलती है धूप हल्की हल्की कभी कभी इन सर्दियों के दिनों में और गिरती है बहुत ज्यादा बर्फ जो जम जाती है धूप के निकलने से चटकती है फिर थोड़ी-थोड़ी पर पिघलती नहीं जल्दी फिसलन पैदा करती है... पर अच्छी लगने लगती है यह बर्फ़ ये ठिठुरन यह सर्दियां इस सर्द मौसम में नर्म कोमल धूप की गरमाहट से भरकर ... Limitless limitless 6,2,21
अटूट विश्वास
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उदास होने से दुखी होने से रोने से खुशियां वापस नहीं लौटती हैं अगर खुशियां आनी हैं तो वह अपने आप से आपके पास आ जाएंगी और सारा कुछ दे जाएंगी जिसको आपने सोचा भी नहीं होगा आप वह पा जाओगे जो आपने कभी सपने में उम्मीद भी नहीं की होगी एक विश्वास होना चाहिए अटूट विश्वास बस अगर आपके पास विश्वास है तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको आपके सपने से दूर नहीं कर सकती आपकी खुशियों से दूर नहीं कर सकती बस हर काम के लिए आप विश्वास बनाए रखो उम्मीद जगाई रखो कभी भी उदास नहीं होना न दुखी और ना ही कभी नाउम्मीद ... सीमा असीम 2,2,21
दर्द
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जब मन अकुलाता है तो आंखों से बरस जाता है न जाने कैसी हूक सी उठती है पेट में फिर कुछ भी समझ में नहीं आता है बस रोता ही रहता है समझता ही नहीं किसी भी हाल समझता ही नहीं ना जाने कितनी देर तक रोता रहता है सुबकता रहता है किसी की कोई बात याद आती है उसके वह शब्द जो हमारे दिल को दुख देते हैं या उसकी वे बातें जो बार-बार दिल में दर्द पैदा करती है और हम रोते रहते हैं समझते ही नहीं है समझ आता ही नहीं है होता है होता है ऐसा अक्सर ही होता है मेरे साथ... क्यों दुखाते हैं दिल लोग आपका,क्यों कहते हैं ऐसी बातें जिससे आपके दिल को चोट पहुंचती है? क्यों करते हैं वे काम वे बातें जो आपको अच्छी नहीं लगती और जिसको देखकर आप अपने आप को संभाल नहीं पाते तब सिर्फ रोना ही आपके बस में रह जाता है... और फिर आप हल्के हो जाते हो और माफ कर देते हो उसे बिना कुछ कहे ही... सीमा असीम 1,2,21
तिलक
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हटो हटो हटो दूर हटो, रात को कोई तिलक लगाता है जाओ जाओ किसी और के लगाओ, हम नहीं लगाते तिलक रात को! बुरी तरह से झिड़क दिया था उस छोटे से मासूम बच्चे को एक गरबीले, घमंडी,नकचढे इंसान ने, यह देखते ही मेरे मन में एक अजीब सी बेचैनी सी पैदा हो गई उस बच्चे के लिए मन में दर्द भरा आया और आंखों में हल्की सी नमी भर गई! कोई ऐसा कैसे कर सकता है किसी के मन में किसी के प्रति इतना दुर्भाव कैसे हो सकता है? क्या गलती है उसकी वो माथे पर तिलक ही तो लगाना चाहता है जब आप रात को मंदिर जा सकते हो तो तिलक रात को क्यों नहीं लगा सकते अनेकों सवाल मेरे मन में उमड़ने लगे! वह भी तो एक इंसान ही है, माना कि वह इतना सक्षम नहीं है तुम्हारी तरह धन दौलत से भरपूर नहीं है तुम्हारी तरह, लेकिन खाता तो वह भी रोटी ही है, हो सकता है जो तुम मक्खन या घी में भिगोकर रोटी खाते हो और वह नमक से सूखी रोटी खाकर गुजर कर लेता है! सुबह ही निकल पड़ता होगा चंदन की कटोरी लेकर के मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के माथे पर तिलक लगाकर कुछ पैसे कमा लेगा, हर कोई पैसे कमाता है कोई पैसे तिजोरी भरने को कमाता है और...
बांसुरी
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मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर वह दिनभर बेचती है मोर पंख लगी बांसुरी कुछ बिक जाती है और कुछ रह जाती हैं कुछ लोग खरीद लेते हैं प्यार से उसे पूरे पैसे दे देते हैं और कुछ मोलभाव करते हैं और फिर खरीदते भी नहीं छोड़ कर चले जाते हैं कुछ लोग उसे झड़प देते हैं हटो हटो नहीं चाहिए दिन भर मेहनत करने के बाद बमुश्किल कुछ कमा पाती होंगी ₹10 की बेच के एक बांसुरी है न जाने कितनी बांसुरी बेच पाती होगी या शायद कभी एक बांसुरी भी नहीं बेच पाती होगी ना जाने कितने लोग होते होंगे उसके घर में ना जाने वह कैसे लोग का पेट भर पाती होगी शायद वह अकेले ही रहती होगी शायद उसका एक बेटा होगा या शायद उसकी एक बेटी होगी जो राह तकते रहते होंगे कि मां आएगी कुछ पैसे कमा कर लाएगी और उसका पेट भर पाएगी सुहागन तो कहीं से नहीं लगती पति नहीं होगा शायद या होगा भी तो शराबी होगा या फिर बिगड़ा हुआ होगा नहीं करता होगा देखभाल अपनी पत्नी की अपने छोटे बच्चों की ज्यादा उम्र तो नहीं लगती इसकी मुश्किल से 35 साल होगी या 30 साल बच्चे अभी छोटे ही होंगे इसके ...
उड़ान
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उठो जागो चलो और लग जाओ अपने काम पर कि यह जिंदगी दोबारा नहीं मिलती है कि जिंदगी मिल भी जाए तो जवानी फिर नहीं मिलती है... निर्भय होकर नम्रता के साथ अपने कर्म पथ पर लग जाओ देखना मंजिल बहुत करीब होगी, इतनी ऊंची उड़ान भरो कि लोग देखें तो देखते रह जाए पंछी तुम्हारा साथ पाना जाए... हमारी खुशी दूसरों की खुशी में तो है पर अपने अंतर्मन को हमेशा पाक साफ रखो कि उसमें इतनी ऊर्जा भर जाए उसमें इतनी उष्मा भर जाए कि आपका मन कभी थके ही नहीं..चलता जाए, चलता जाए हर काम हर बात को हर बाधा को दूर करते हुए आगे बढ़ता ही चला जाए.. अपना समय अपनी उर्जा को यू व्यर्थ जाया मत करो, बेकार की चीजों में मत लगाओ अपने समय को अपने काम को अपनी ख्वाहिशों को, अपनी उम्मीदों को,अपने ख्वाबों को पूरा करने में लगा दो.... पर करो पर चलो पर आगे बढ़ो पर उड़ान भरो लेकिन अपने अनुभवों में कुछ अच्छे हो या बुरे कभी घबराओ मत उनका उनका सामना करो उनका डटकर सामना करो.... फिर देखना आपके किरदार से क्या महक आती है अपने किरदार को इतना निखारो, इतना सवारो कि पूरी दुनिया ही महक जाए दुनिया में...
ख़ुशी के लिए
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प्रेम को पाने के लिए प्रेम में डूबना पड़ता है यह आग का दरिया है जलकर भस्म होना पड़ता है यूँ ही मिल जाता किसी को प्रेम तो मीरा दीवानी नहीं होती जहर के प्याले को अमृत समझ नहीं पीती.... कृष्ण भी कहाँ द्रोपदी का चीर बढ़ाते न उसकी एक पुकार पर दौड़े चले आते.... जंगलो की खाक झानते फिरे राम वनवास में सीता के प्रेम मे स्वर्ण मृग का न शिकार करने जाते भूल कर सुध बुध प्रिय सीते सीते पुकारते रहे वे भगवान थे फिर भी प्रेम को भगवान मानते रहे.... प्रेम कोई खेल नहीं कि इंसान इसे खेले खुद की ख़ुशी के लिए दूसरों को दुःख दे दे.... आचमन नहीं है प्रेम कि चखा और छिड़क दिया सिर माथे पर लगाकर पहले खुद की ख़ुशी भूले जीना पड़ता है उसके लिए सब कुछ भुला कर प्रेम करने से पहले जरा सच्चे इंसान होले... सीमा असीम 12,1,21
अहसास
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हम सोचते बहुत ज्यादा है पर महसूस नहीं करते ना जाने क्या क्या सोचते रहते हैं दुनियादारी की बातें यहां वहां की बातें बेकार की बातें परेशान होने की बातें समझ ना आने वाली बातें बस हम सोचते ही रहते हैं पर कभी गहराई से महसूस नहीं करते कभी एहसास में नहीं भरते सच में देखा जाए तो एहसासों की दुनिया बहुत प्यारी है बहुत खूबसूरत है कभी एहसास करके तो देखो जीवन को महसूस करके तो देखो सब समझ आ जाएगा क्योंकि एहसासों की दुनिया सच्ची दुनिया होती है मन की दुनिया होती है जहां होते हैं रंग बिरंगे फूल खुश्बू पक्षी तितलियां आसमान और होता है क्षितिज जहां मिलते हैं धरती आकाश एकाकार होने के लिए.... सीमा असीम 9,1,21
ख़ुशी
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अपनों को खुशी देने से जो खुशी आपके चेहरे पर आती है वह अनोखी होती है असीमित होती है उसका कोई ओर छोर ही नहीं होता... पर हम ऐसा करते ही कहां है हम अपनी खुशी के पीछे भागते रहते हैं अपनी खुशी के लिए जाने कितने उतार-चढ़ाव चढते रहते हैं पर पाते क्या हैं कुछ नहीं कभी मुस्कुराया करो दूसरों को खुश देखकर कभी दूसरों को ख़ुशी बाँट आया करो जिंदगी है इसी का नाम न रूठो किसी से पर जरूरत पड़े तो मनाया करो प्रेम की राह पर चलकर तो देखो अहसासों से भर जाओगे भूल जाओगे खुद ही को तुम ज़िन्दगी में महक से भर जाओगे... सीमा असीम 8,1,21