सिर्फ मेरे हो तुम
हां याद करती हूं तुम्हें
तुम भी वहां याद करते होगे मुझे
मेरा तो रोम-रोम पुकार ने लगता है तुम्हारा नाम
जरूर तुम भी मुझे आवाज देते होगे वहाँ
पल पल प्रतिपल
सिर्फ तुम्हारा ख्याल तुम्हारा नाम
और कुछ भी नहीं ऐसे
दुनिया में हो कर भी दुनिया की नहीं मैं जैसे
कभी यूँ ही याद करते रो लेना
कभी यूं ही याद करके मुस्कुरा लेना
कितनी मधुर स्मृतियां है हमारे तुम्हारे बीच
कई जन्मों तक याद करती रहूंगी फिर भी पूरी नहीं होगी
इन स्मृतियों में खोकर
कब गुजर जाते हैं दिन रात
कई जन्म भी गुजर जाएंगे यूं ही
पहाड़ों की ऊंची नीची गोल घुमावदार सड़कों पर चलते हुए
कितने ख्वाब बुने थे हमने
कभी हाथों में हाथ डाल
कभी आंखों में आंखें डाल
तुम्हारा वह मुस्कुराता हुआ चेहरा
तुम्हारा कभी नाराज हो जाता हुआ गुस्सा करता हुआ वह चेहरा
कुछ भी तो नहीं आंखों से दूर जाता मेरे पल भर को
भी
शायद तुम भी यूँ ही याद करते होगे मुझे
किस सिर्फ अकेले में ही नहीं चल रही हूं इस बिरहा की अगन में
तुम हो सदा मेरे साथ इसका एहसास होता रहता है मुझे
की हो सिर्फ मेरे तुम
हां तुम सिर्फ मेरे हो
और रहोगे सदा सिर्फ मेरे ही हो कर.....
सीमा असीम
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