तू जब आता है
रात भर तुम्हें याद करते रहे
दर्द से हम तड़पते रहे
भिगोते रहे अपनी पलकों को हम
दिल को हाथों से अपने मसलते रहे
नींद भी आँखों से गायब हुई
ख्वाब में मिलने को तरसते रहे
तू आयेगा लौटकर जब जालिमा
तब तक हम जीते मरते रहे
यूँ क्या कहूँ तुझको तू ही बता
अगन में अपनी बस सुलगती रही...
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