गौर से देखने पर पता चलता है कितना भयानक है इस झूठी दुनिया का सच्चा चेहरा, मैं बेतहाशा डर जाती हूं घबरा जाती हूं और सोते से उठकर बैठ जाती हूँ दिल तड़प  जाता है मेरा, बेतहाशा आँसू बहते हैं और चैन नहीं आता,, समझ नहीं आता क्या करूं? क्यों है दुनिया का ऐसा चेहरा, क्यों किसी के दिल में जरा सर दर्द नहीं होता, इतने मतलबी इतने स्वार्थी इतने धोखेबाज क्यों है दुनिया में लोग?  हे ईश्वर मैं जानना चाहती हूं, मुझे बताओ? क्यों धोखा करते हैं लोग? क्यों किसी के साथ छल करते हैं लोग? क्यों किसी को लूट लेते हैं लोग? क्यों किसी को बर्बाद कर देते हैं लोग?

 क्या उन्हें रत्ती भर भी एहसास नहीं होता है? क्या उन्हें कोई भी तकलीफ नहीं होती? क्या उन्हें कोई भी सजा नहीं मिलती?क्यों   आखिर क्यों?

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