दुआ
हंसते चेहरे को रुलाने वाले
दर्द से सारी रात जगाने वाले
कहां बदलेंगे तेरी आदतें चाहे कुछ भी हो
मगरूर खुदा के खौफ से भी ना डरने वाले
एक दिन तो तेरी अकल में सब आएगा
देख उस दिन तू हाथ मलता रह जाएगा
कुछ भी बचा नहीं होगा तेरे पास में
इस आह का कोई तो अंजाम आएगा
अपनी सहूलियत से हर रिश्ते को निभाने वाला
तेरा मुक़द्दर ही तुझे धोखा दे जाएगा
कब तक तू दूसरों को बुरा खुद को भला कहेगा भला
मेरे दर्दे दिल को कभी तो आराम आएगा
एक ही पल में दुनिया को उजाड़ने वाला
तेरा हर आसरा एक दिन गुजर जाएगा
दिल में सिर्फ दुआ ही दुआ थे तेरे लिए
कुछ दिल को तड़पा कर सताकर रुलाने वाले
एक दिन तू भी मेरे दर्द से बेजार हो जाएगा
मांगता फिरेगा पनाह चारों तरफ
तू एक बूंद पानी को तरस जाएगा
यह दुआएँ अगर कबूल करेगा मेरे ईश्वर
तो मेरा दिल और भी तड़प जाएगा
वो जैसा भी है है तो मेरा ही
वो जरूर एक दिन यह बात समझ आएगा....
सीमा असीम
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