दिलबर के सोने के बाद भी मन को शांति नहीं मिलेगी मन में बहुत सारी बेचैनी बहुत सारी तड़क-भड़क रही थी तो क्या करे खुद को खत्म कर ले लेकिन क्या खत्म करने से समस्याओं का समाधान होगा जीते जी जो चीजें हम सही कर सकते हैं क्या मरने के बाद हम कर सकते हैं वरना तो चने के झाड़ पर में मर सकते हैं लेकिन जो मरने के बाद तकलीफ है परेशानियां हमारे साथ रहेंगे उसे रोक नहीं पाएंगे कैसे पाएंगे तभी उसने अपनी आंखों को बहते हुए आंसू को हाथों से पूछा और उठ कर खड़ी हो गई रोना तो किसी भी समस्या का समाधान नहीं है बल्कि हम अपनी आंखों को रो-रो कर खराब कर लेते हैं उसके बाहर आई और राज के पास जाने के पहले कदम उसी तरह पढ़ा दिए देखा आज खाना खाने के बाद उसका हाथ धो रहे हैं जाना ही पड़ेगा बात करनी ही पड़ेगी आखिर वो राज के बिना कैसे रहेगी रास्तों उसकी जान है
प्रेम
जहाँ प्रेम है वहाँ सुख है ख़ुशी है जहाँ सुख है ख़ुशी है वहाँ है प्रेम प्रेम क्षणभंगूर नहीं अनंत काल की यात्रा है एक जीवन में कहाँ पूरा होता है प्रेम न जाने कैसे कर लेते हैं लोग छोटे से जीवन में किसी से घृणा प्रेम नफ़रत और जरा देर में बदल लेते हैं अपनी भावनाओं को वो कब समझेंगे क्या होता है प्रेम न कहने से न सुनने से अहसासों की भाषा है यह आत्मा से आत्मा का मिलना है प्रेम फूल इंद्रधनुष बारिश ओस देख मुस्कुरा देता है मन भोला भोला मासूमियत से भरा होता है प्रेम प्रेम करते हैं सभी जीवन में एक बार जरूर जो निभा ले सच्चे मन से वहां ईश्वर बन जाता है प्रेम!! सीमा असीम
Comments
Post a Comment