दिलबर के सोने के बाद भी मन को शांति नहीं मिलेगी मन में बहुत सारी बेचैनी बहुत सारी तड़क-भड़क रही थी तो क्या करे खुद को खत्म कर ले लेकिन क्या खत्म करने से समस्याओं का समाधान होगा जीते जी जो चीजें हम सही कर सकते हैं क्या मरने के बाद हम कर सकते हैं वरना तो चने के झाड़ पर में मर सकते हैं लेकिन जो मरने के बाद तकलीफ है परेशानियां हमारे साथ रहेंगे उसे रोक नहीं पाएंगे कैसे पाएंगे  तभी उसने अपनी आंखों को बहते हुए आंसू को हाथों से पूछा और उठ कर खड़ी हो गई रोना तो किसी भी समस्या का समाधान नहीं है बल्कि हम अपनी आंखों को रो-रो कर खराब कर लेते हैं उसके बाहर आई और राज के पास जाने के पहले कदम उसी तरह पढ़ा दिए देखा आज खाना खाने के बाद उसका हाथ धो रहे हैं जाना ही पड़ेगा बात करनी ही पड़ेगी आखिर वो राज के बिना कैसे रहेगी रास्तों उसकी जान है 


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