ना जाने कौन सा सुख

 ना जाने कौन सी खुशी

 ना जाने कौन सा आराम

मिला होगा उसे

 यू मुझे सता के यूँ मुझे रुला के यूं मुझे दुःख देकर

 कैसे खुद से नजर मिला पा रहा होगा वह

 कैसी खुशी मना पा रहा होगा वह

 कैसे आती होगी उसके चेहरे पर मुस्कान

 क्या उसका दिल नहीं घबराता होगा

 क्या उसे सकुं की नींद आ जाती होगी

 क्या उसकी बार-बार आंख नहीं भर आती होगी

 क्या उसकी आँखों के सामने

 किसी फिल्म की तरह वे चित्र नहीं चलते होंगे

 जो गुजारें हैं हमने साथ साथ

 लेकर हाथों में हाथ

 अभी साथ-साथ खाते हुए

 कभी साथ-साथ बतियाते हुए

 कभी सुख शांति से एक दूसरे को देखते हुए

 कभी बहुत दूर यात्रा पर जाते हुए

 कितने पल  कितनी यादें कितनी सारी  बातें मुलाकातें

 दिल से दिल जब जुड़ जाता है

 तो आत्मा से रिश्ता बन जाता है

 लाख कोशिशों के बाद भी

 कभी टूट नहीं पाता है

 जिस पल भी मेरी आंख में आंसू आते हैं

 उस पर उसकी आंखों से भी आंसू बहते होंगे

 सुनो तुम मुझसे अलग नहीं हो

 तुम मुझे मैं हूं और मैं तुझ में


 तुम मेरे हो सिर्फ मेरे

 जैसे कि मैं हूं तेरी सिर्फ तेरी...

सीमा असीम 

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