मौसम तो बहुत सर्दी हो रही थी आज थोड़ी सी धूप निकली थी तू सोचा चलो बाजार के कुछ काम कर लिया जाए थोड़ी सामान खरीदा करके जरूर तुम्हीं से खरीदी और वापस आने के लिए गाड़ी में बैठे ही रहे थे की सामने एक ठेले पर फ्रूट चाट बिकती हुई दिख गई तो सोचा चलो थोड़ा सा खा लेते हैं मूवी फ्रेश हो जाएगा गाड़ी में रख कर के पास पहुंच गई और उसे का एक प्लेट बनाकर दे दो बस उससे इतना ही कहा था कि वहां पर तीन-चार छोटे-छोटे बच्चे पैसे मांगने के लिए आगे दीदी हमें भी खिला दो दीदी हमें भी खिला दो कहकर वह सब हमारे आसपास खड़े हो गए भी करीब चार पांच बच्चे थे और सब 8 से 12 साल की उम्र के ही थे फ्रूट चाट वाला बड़ी तल्लीनता से अपनी चाट बनाने में लगा हुआ था और भी बच्चे की तरह देख रहे थे और उस चाट की तरफ, मैं बहुत असमंजस में थी क्या करूं यह सब बच्चों को फ्रूट चाट खिलाओ या फिर मैं इन लोगों को पैसे दे दो चलो एक ऐसे रखो तुम सब मिलकर चार्ट खा लेना अभी ऐसा कहकर मैंने उन बच्चों के हाथ में 120 का नोट पकड़ा दिया, उन बच्चों की शादी फ्रूट चाट वाला वाला आप लोग इन बच्चों को पैसे देकर ही तो इनकी आदत खराब कर रहे हो ए क्यों कोई काम करेंगे जब उन्हें ऐसे ही काम चल जाता है तुम जैसे लोग आते हैं और इन्हें पैसे देकर चले जाते हैं, कितनी गहरी बात उसने आसानी से कह दी थी और मैं जाट पैक कराकर यही सोचते हुए काल में आकर बैठ गई
मुस्कुराना
कितना अच्छा लगता है सुबह सुबह सूरज का निकलना पंछियों का चहकना फूलों का खिलना और रोशनी का बिखर जाना रात के अंधेरे को मिटाते हुए जब रोशनी होती है तो मन खुशी से प्रफुल्लित होता है बहुत अच्छा लगता है मुझे दुनिया को रोशनी में देखना मुझे नहीं पसंद अंधेरा नहीं पसंद मुझे मुरझाना नहीं पसंद मुझे रोशनी का कम हो जाना लेकिन सुनो इस सब से भी ज्यादा अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा मुस्कुराना तुम्हारा मुझ से बतियाना....... सीमा असीम 3, 10, 20
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