तुम सिर्फ मेरे ही हो

 तुम एकदम सच ही तो कहते थे कि मैं तेरा हां हां सिर्फ तेरा ही हूं चाहे मैं यहां रहा हूं चल मैं वहां रहा हूं चाहे किसी के साथ बैठे हो क्या मैं किसी के साथ खड़ा रहूंगा चाहे किसी से बातें करो चाहे किसी के साथ मुस्कुराओ चाहे मैं किसी के साथ फोटो खींचा हूं चाहे मैं किसी के साथ घूमने जाऊं लेकिन मैं हूं तेरा ही हां तुम बिल्कुल सच कहते थे मुझे यकीन हो गया तुम सिर्फ मेरे  ही हो।  क्योंकि  तुमने ही तो कहा मैं तेरा हूं तेरी मुस्कान में हूं मैं तेरे आंसुओं में हूं तेरे ह्रदय में हूं तेरे रग रग में हूं तेरे खून में हूं।  जहां रहेगी तू, बस मैं वहां हूं प्रत्यक्ष रूप से नहीं हमेशा अप्रत्यक्ष रूप से।  मैं सिर्फ तेरा और तेरे साथ ही हूं । तू कभी भी अपने को अकेला मत समझना । जब तू दुखी होगी तो मैं तेरे आंसू में बह लूंगा, जब तू खुश होगी तो मैं तेरी मुस्कान में रहूंगा।  तू कहीं भी रहेगी मैं तेरे साथ रहूंगा । तू कभी आजमा मैं तेरा ही हूं तेरे साथ हूं और सदा सदा तेरा ही हूँ। 

 आज मेरा विश्वास पक्का  हो गया कि कभी भी तुम किसी और के हो ही नहीं सकते किसी के  भी नहीं चाहे कहीं पर भी चले जाओ लेकिन रहोगे सिर्फ मेरे ।  और तुम्हारे रहते  मैं कभी अकेली होती भी नहीं हूं कभी भी नहीं अकेले हो कर भी कभी अकेले नहीं होती हूँ  क्योंकि तुम होते हो हमेशा मेरे साथ में कहीं पर भी चलने फिरने उठने बैठने सोने गाने जागने में । कहीं भी कभी भी हमेशा हमेशा तुम मेरे साथ होते हो और तुम मेरे ही हो । 


असीम 

Comments

Popular posts from this blog

मुस्कुराना

याद