तुम मेरे
मैं हर पल तुम्हें याद करती हूं
मैं हर पल तेरा नाम लेती हूं
क्या तुम्हें एहसास नहीं होता
यहां मेरी आंखों से आंसू जब बहते हैं
जरूर तेरी आंखों में नमी आती होगी
जरूर तू भी ऐसे ही उदास होता होगा
मेरी ही तरह उदास उदास निराश
लगती होगी तुझे भी दुनिया सुनी सुनी
कहीं कुछ अच्छा नहीं लगता होगा
होता होगा तू भी भरी महफिल में अकेला
मेरा नाम लेकर तू भी पुकारता होगा
कैसे गुजरते हैं मेरे साँझ ओ शहर दिन रात
रोम रोम तेरा नाम बुलाता है
जानती हूं पूरा विश्वास है मुझे
कि तुम मेरा है सिर्फ मेरा
जैसे मैं हूं तेरी सिर्फ और सिर्फ तेरी
सीमा असीम
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