ना जाने किस दुविधा में पड़ी रहती हूं

 ना जाने मैं क्यों सब कुछ सोचती रहती हूँ

 जबकि जानती हूं मैं खूब अच्छे से समझती हूं मैं

 तुम तुम मेरे ही हो

 चाहे कहीं पर भी रहो

 रहोगे सिर्फ मेरे ही

न किसी के बारे में सोच पाओगे

न कभी तुम विचार पाओगे

 मैं जानती हूं कि

 मैं हूं सदा तुम्हारे ख्यालों में

 मैं हूं सदा तुम्हारे विचारों में

मैं हूँ सदा तुम्हारी बातों में

मैं हूँ सदा तुम्हारी यादों में 

जब कहीं किसी से बात करोगे

करोगे सिर्फ मेरी ही बातें

मुझे पता है मैं  तुम्हारे दिल में रहती हूँ

धड़कनों में धड़कती हूँ

मेरा नाम तुम्हारी जुबां पर है

तो तुम जाओ कहीं भी

या रहो कहीं भी

हो तुम मेरे ही

सीमा असीम 



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