दर्द की इंतिहा हो रही है अब
रात की नींद दिन का चैन खो रहा है अब
तुम्हें मेरे रोने पर भी हँसी आती है
पुकारता है आवाज देकर दिल मेरा अब
कुछ अहसास तुम्हें भी होता तो होगा
नहीं तो यूँ बेकरारी न होती मुझे अब
आ जाओ आना ही पड़ेगा तुम्हें
कैसे हो तुम मुझे बताना पड़ेगा
क्यों कर इतने सितम कर रहे हो
जीते जी मरने को छोड़े दे रहे हो
आओ देखो जरा हाल मेरा
मेरे ही हो तुम सिर्फ मेरे ही
इतना तो समझ ही लो अब
असीम
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