तुमने अकेले ही फैसला लिया और लागू कर दिया

 क्या तुमने सोचा कभी की रिश्ता एक तरफा नहीं होता

 जब रिश्ता तो तरफ से है तो फैसला भी दो तरफ से होना चाहिए

 जब जज भी फैसला करता है तो वह दोनों पक्षों की सुनता है

 पहले

 फिर वह कोई अपना फैसला सुनाता है

 तुम कोई ईश्वर तो नहीं हो

 जो तुमने जब चाहा जिसे चाहा मार दिया

 अपनी खुशी के लिए

 कोई सिर्फ तुम्हारी ही खुशी तो मायने नहीं रखती ना

 दूसरा जो तुम्हारे साथ रिश्ते में बंधा है

 क्या उससे एक बार भी नहीं पूछा जाता

 उसकी खुशी के बारे में उसके सुख के बारे में उसके दुख के बारे में

 जब किसी को मौत की सजा दी जाती है ना

 तो उससे भी उसकी राय पूछी जाती है

 और सबसे पहले तो मौत क्यों दी जा रही है उसकी वजह भी बताई जाती है

 ऐसा नहीं होता की  बंदूक उठाई और गोली से उड़ा दिया

 क्या तुम जानते हो किसी के खून करने की सजा क्या होती है

 ऐसी सजा

 जो तुम्हारे कर्म के आधार पर प्रकृति तुम्हें देती है

 क्योंकि कुदरत का भी एक कानून होता है

 और कुदरत कभी किसी को माफ नहीं करती

 उसके हिस्से की सजा उसे मिलकर रहती है

 एक बार को कानून तो माफ कर देता है

 पर प्रकृति कभी माफ नहीं करती

 वो लेती है बदला अपना समय आने पर

 क्योंकि खून करने पर किसी का जो खून बहता है आत्मा से निकलता है

 आत्मा साक्षी है ईश्वर की

 आत्मा में बसते हैं ईश्वर

 आत्मा को तुम कितना भी मारो नहीं मरेगी

 पर तुमने कोशिश की आत्मा को मारने की

क्योंकि तुम मरी हुई आत्मा के इंसान हो

 तुम्हारे पास तुम्हारी आत्मा नहीं

 तुम सिर्फ एक शरीर हो

 सिर्फ एक शरीर चलता फिरता बेजान जिस्म

 जिसमें रूह नहीं बस्ती है

 अगर वह बस्ती होती

 तो महसूस किया हो ना होता रूह के दर्द को आत्मा के कष्ट को

 एक आत्मा ही दूसरी आत्मा की तकलीफ को समझ सकती है

 एक रूप है दूसरे रूह को समझ सकती है

 उसके दुख दर्द तकलीफ और आंसुओं को

 आत्मा के भीतर से बहते हुए आंसू

 दुनिया में प्रलय लाते हैं

 लेकिन मैं चाहती हूं प्रलय दुनिया में नहीं आए

सिर्फ तुम पर आए गिरे

 और उस दिन महसूस कर सको तुम

 आत्मा की शक्ति को

 जो किसी भी रूप में ईश्वर से कम नहीं होती...

सीमा असीम 

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