जिंदगी की राहों पर चलना सिखाए

 इंसानियत का पढ़ाई पाठ और चीन सिखाएं

 धैर्य धर्म-कर्म का पाठ पढ़ाते हुए

 हर मुश्किल में हर कठिनाई में बस मुस्कुराना सिखाएं

 डग डग पर हो उसका साथ

 परछाई की तरह रिश्ता निभाएं

 सम्मान के साथ जिसके आगे झुक जाए बार-बार सर

 बस वही श्रेष्ठ गुरु कहलाये

 सूर्य से ऊर्जा होश में और चांद से शीतलता

 अंबर सा विस्तार है उनमे

 नदी की सी निश्छल कल कल कल कल

 गुरु की गरिमा से बड़ा नहीं कोई और ना उससे बड़ा कोई आकाश है

मन में रखो विश्वास

सच्ची भक्ति ही कर देगी बेडा पार 





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