मैं सच में जानना चाहती हूँ हाँ समझना चाहती हूँ कि तू ऐसा क्यों है ? क्यों झूठी बातें करता है और खुद की नजरों में ही गिर जाता है बार बार वही हरकतें जाहिलों की तरह ,,, हद है वाकई हद है , अब तो सुधार जाओ आखिर कब तक करोगे यह सब ? कभी तो तुझे समझना चाहिए । कोई तुझे बदनाम कर रहा है अपनी नजरों से गिरा रहा है फिर भी तू उसी के पीछे लगा हुआ है । तुझे कोई फर्क नहीं पड़ता होगा लेकिन उनके बारे में तो सोचा कर जो तुझसे जुड़े हुए हैं और जो तेरे अपने हैं कितना दुख होता होगा उन लोगों को तेरी इन गिरी हरकतों की वजह से । आज फिर रवीना ने माधव को डांटते हुए कहा । यह जानते हुए भी कि इसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा यह ऐसा ही रहेगा क्योंकि इसकी तो आदत ही पड गयी है यही सब करने की बस वह रो धो कर और चीख चिल्ला कर खुद को दुख पहुंचा कर शांत हो जायेगी और पहले की ही तरह इसकी देखभाल और परवाह करने लगेगी ।
चांद को देखना एक तक देखते जाना घटते बढ़ते और 16 कलाओं से परिपूर्ण होते जाना कितना सरल है ना चांद को देखना चांद की पवित्र चांदी में नहाई धरती पर अपनी परछाई को पकड़ने की कोशिश करना छोटी बड़ी आड़ी तिरछी लंबी नाटी परछाई को पकड़ कर अपने गले से लगाने की कोशिश करना सरल है ना परछाई को नापना इतना ही सरल तो है बस तुम्हें पढ़ना और सिलसिलेवार लिखते चले जाना चाँद का आसमां में मुस्कुराना सीमा असीम 23,2,21
Comments
Post a Comment