मेरी आँखों में भरे हुए यही आँसू

तेरी बेवफाई की दास्तां कहते हैं

तू गिरा औऱ गिरता चला गया

शर्म की एक लकीर भी नहीं

चेहरे पर तेरे

तू क्या समझता है कि

तू अपनी गिरी हरकतों से

दुनिया जीत लेगा

अरे बेशर्म तू खुद को न जीत पाया

हर बार हारता ही रहा औऱ

बेशर्मी को इज्जत समझता रहा

अब तू जा चाहें कहीं भी जा

नहीं करुँगी तेरी परवाह

न तेरी कोई इज्जत

मेरी नज़र में रही अब 

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